सीधी जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए मझौली की प्रभारी परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक ज्योति विश्वकर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ग्राम पांड क्रमांक-01 की आंगनवाड़ी सहायिका पद की आवेदिका किरण बैगा द्वारा लगाए गए उस गंभीर आरोप के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने बताया था कि अधिकारी ने एमपी ऑनलाइन चयन पोर्टल के माध्यम से आए उनके आवेदन पर नौकरी दिलाने के एवज में व्यक्तिगत रूप से और फोन पर 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। मामला शासन स्तर तक पहुंचने के बाद यह सख्त प्रशासनिक कदम उठाया गया है।
विभागीय जांच के दौरान यह बात सामने आई कि नियुक्ति प्रक्रिया में जानबूझकर एक महीने से अधिक समय तक देरी की गई थी। इसी बीच, रिश्वत की मांग से जुड़े तीन अहम ऑडियो प्रमाण भी जांच के दौरान पुख्ता साक्ष्य के रूप में सामने आए। विभाग ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियमों के विपरीत और गंभीर कदाचरण की श्रेणी माना है।
इन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत ज्योति विश्वकर्मा को 31 अगस्त 2026 से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना रामपुर नैकिन क्रमांक-01, जिला सीधी तय किया गया है, और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।




