Home Loan लेने की सोच रहे हैं? अपना लो ये तरीके, Tax के साथ होगी ये बचत

Home Loan Repayment

Home Loan: आज के दौर में अपना खुद का घर होना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात है. जी हां महंगाई के दौर में रहने की व्यवस्था होना बड़ी बात है. और लोगों का सपना भी होता है की अपना घर बनाना है. हालांकि, आजकल प्रॉपर्टी के दाम काफी बढ़ रहे हैं. ऐसे में अब कई लोग बैंक से होम लोन लेकर खुद का घर खरीद रहे हैं. ऐसे में अगर आप भी आने वाले समय में बैंक से होम लोन लेकर खुद का घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो ये खबर आपके लिए बहुत ही जरूरी होने वाली है.

होम लोन लेने वाले हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताने वाले हैं, जिनसे आप टैक्स में अच्छी बचत कर सकते हैं और होम लोन में अपना खर्च भी बचा सकते हैं. चलिए जानते हैं…..

Home Loan Tenure (होम लोन की अवधि)

होम लोन एक बड़ा लोन होता है. ऐसे में इस लोन की अवधि भी बड़ी होती है. गौर करने वाली बात यह है कि, लोगों के लिए जरूरी है कि वह अपने लोन के लिए एक सही अवधि का चुनाव करें. लोन की अवधि मंथली EMI और कुल ब्याज को प्रभावित करती है. अगर अवधि कम होगी तो आपका ब्याज भी बच सकता है.

साथ ही लंबी अवधि चुनने पर EMI कम होती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है. वहीं छोटी अवधि में EMI ज्यादा होती है, लेकिन कुल खर्च कम रहता है. ऐसे में सोच समझकर और अपनी आय को देखते हुए एक सही अवधि चुनें.

होम लोन की प्रीपेमेंट

आपको बता दें कि, होम लोन की अवधि के बीच जरूरी है कि आप बीच बीच में अतिरिक्त पैसों का इस्तेमाल करें और लोन की प्रीपेमेंट करें. क्योंकि इससे शेष लोन की रकम कम होती है, और ब्याज का बोझ घटता है और साथ में लोन की अवधि भी कम होती है. फ्लोटिंग रेट वाले अधिकांश लोन में प्रीपेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता है.

Home Loan & Tax Benefit (होम लोन में टैक्स छूट)

एक और खास बात यह है कि, होम लोन पर ब्याज और मूलधन दोनों पर टैक्स छूट मिलती है. ब्याज भुगतान पर अलग टैक्स बेनिफिट मिलता है और Principal repayment पर अलग deduction मिलता है. ऐसे में अगर इन सुविधाओं का सही इस्तेमाल किया जाए तो हर साल अच्छी टैक्स बचत हो सकती है.

Joint Home Loan Benefit (ज्वाइंट होम लोन के लाभ)

अगर पति-पत्नी दोनों कमाते हैं, तो वह ज्वाइंट होम लोन ले सकते हैं. यह तरीका काफी फायदेमंद हो सकता है. ज्वाइंट होम लोन में पात्रता बढ़ जाती है. साथ ही दोनों को अलग अलग टैक्स बेनिफिट्स भी मिलते हैं.

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