रीवा। रीवा संभाग के शासकीय महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। अब कॉलेज के छात्र अपनी नियमित पढ़ाई और डिग्री पाठ्यक्रमों के साथ-साथ मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC), संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) तथा अन्य राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बिल्कुल निःशुल्क कर सकेंगे। प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य छात्रों को कॉलेज स्तर पर ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार प्रदान करना है।
संभागीय आयुक्त की पहल पर अतिरिक्त संचालक ने जारी किए निर्देश
संभागीय आयुक्त शीलेन्द्र सिंह के विशेष मार्गदर्शन में इस सराहनीय नवाचार की रूपरेखा तैयार की गई है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. महेंद्रमणि द्विवेदी ने त्वरित कदम उठाते हुए रीवा संभाग के सभी शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को अपने-अपने संस्थानों में तत्काल कोचिंग कक्षाएं संचालित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग का स्पष्ट उद्देश्य है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए भटकना न पड़े।
कई कॉलेजों में कक्षाएं प्रारंभ, TRS कॉलेज के प्राचार्य को दिए गए निर्देश
अतिरिक्त संचालक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार संभाग के कई शासकीय महाविद्यालयों में प्रतियोगी कक्षाओं का संचालन पहले ही सफलतापूर्वक शुरू किया जा चुका है, जहां बड़ी संख्या में छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। हालांकि, रीवा के प्रमुख ठाकुर रणमत सिंह (TRS) कॉलेज में अब तक यह व्यवस्था शुरू न होने की जानकारी सामने आने पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। अतिरिक्त संचालक ने TRS कॉलेज के प्राचार्य को पत्र जारी कर बिना किसी देरी के आवश्यक व्यवस्थाएं जुटाकर तुरंत कोचिंग कक्षाएं प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।
महंगे कोचिंग संस्थानों से मिलेगी मुक्ति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सीधा फायदा
प्रशासन की यह पहल उन विद्यार्थियों के लिए एक वरदान साबित होने जा रही है जो मेधावी होने के बावजूद आर्थिक तंगी के कारण निजी कोचिंग संस्थानों की भारी-भरकम फीस चुकाने में असमर्थ थे। महंगे शहरों में जाकर कोचिंग करने और भारी खर्च उठाने की मजबूरी अब खत्म होगी। कॉलेज परिसर में ही विषय विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन मिलने से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और संभाग से प्रशासनिक सेवाओं में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।




