Hindi language And Digital Media In Computer : डिजिटल युग में हिंदी भाषा के लिए अवसर और चुनौतियां-विषय पर व्याख्यान-शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा में ‘हिन्दी-भाषा का कम्प्यूटर में अनुप्रयोग’ विषय पर आयोजित हुआ अत्यंत ज्ञानवर्धक व्याख्यान-हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि आज वह कंप्यूटर, इंटरनेट, एआई और डिजिटल मीडिया की धुरी बन चुकी है। इसी तथ्य को प्रमाणित करते हुए, 28 अप्रैल 2026 को शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा (मध्य प्रदेश) में एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस आयोजन में हिंदी विभाग के हिंदी क्लब प्रमुख रूप से सक्रिय रहा। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के कुशल मार्गदर्शन और डॉ. प्रदीप विश्वकर्मा के संयोजकत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को हिंदी भाषा के तकनीकी पक्ष से परिचित कराना था। इस अवसर पर विषय था-“हिन्दी-भाषा का कम्प्यूटर में अनुप्रयोग”। शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा में हिंदी क्लब द्वारा ‘हिन्दी-भाषा का कम्प्यूटर में अनुप्रयोग’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन। जानें हिंदी और डिजिटल युग के समन्वय की पूरी रिपोर्ट।
आयोजित कार्यक्रम के उद्घाटन की झलकियां
Inauguration of the Program
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के साथ विधिवत रूप से हुई। यह दृश्य ज्ञान और प्रौद्योगिकी के समागम का प्रतीक था। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. वंदना त्रिपाठी ने की, जिन्होंने हिंदी को कंप्यूटर से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता अनुसार सुनिए उन्होनें उद्बोधन में क्या कहा
Keynote Address
व्याख्यान के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.अवधेश प्रताप सिंह,सहायक प्राध्यापक (हिंदी),शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय,सागर (म.प्र.) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में बहुत साफगोई से समझाया कि हिंदी भाषा का अनुप्रयोग आज बहुआयामी है। उन्होंने कहा कि हिंदी अब केवल साहित्य और प्रशासन (राजभाषा) तक सीमित नहीं है, बल्कि-
डिजिटल संचार (Digital Communication) में फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर हिंदी का बोलबाला है।
यूनिकोड (Unicode) के विकास से कंप्यूटर पर हिंदी लिखना, सर्च करना और उसे प्रोसेस करना अत्यंत सरल हो गया है।
ई-लर्निंग और तकनीकी लेखन में हिंदी अब एक प्रभावी माध्यम बन चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वॉयस असिस्टेंट में भी हिंदी का तेजी से एकीकरण हो रहा है। वक्ता ने यह भी बताया कि किस प्रकार हिंदी का कंप्यूटर अनुप्रयोग ग्रामीण और शहरी डिजिटल विभाजन को पाटने में सहायक है।

जानिए किनकी रही विशिष्ट उपस्थिति और सहयोग
Dignitaries and Collaboration
इस अवसर पर डॉ. रामायण पटेल (शासकीय नूतन महाविद्यालय, भोपाल) ने भी अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने हिंदी शिक्षण में कंप्यूटर के भूमिका पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी विभाग के सभी प्राध्यापकों का सराहनीय योगदान रहा। उपस्थित प्रमुख शिक्षकों में शामिल थे जिनमें डॉ. विनोद विश्वकर्मा (वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक),डॉ. बृजेश कुमार साकेत,डॉ. आरती सोनी,डॉ. ज्योति पाण्डेय,डॉ. अल्पना मिश्रा,डॉ. आशुतोष शुक्ला,डॉ. प्रियंका पाण्डेय
तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
इनका रहा संचालन और धन्यवाद ज्ञापन-
Conduct and Vote of Thanks
कार्यक्रम का सफल और आकर्षक संचालन डॉ. बृजेन्द्र कुशवाहा ने किया, जिन्होंने विषय को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। अंत में डॉ. प्रदीप विश्वकर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से उन्होंने प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के मार्गदर्शन और मुख्य वक्ता के सारगर्भित व्याख्यान के लिए धन्यवाद दिया।




