रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में मंगलवार की देर शाम प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया। अचानक बदले मौसम के मिजाज के साथ आए भीषण आंधी-तूफान, मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने पूरे जिले में तबाही के निशान छोड़ दिए हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, बल्कि बेजुबान पक्षियों और किसानों के लिए यह काल बनकर आई। आपदा का सबसे हृदयविदारक दृश्य गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के सहिजना गांव में देखने को मिला, जहां बड़े पैमाने पर हुई ओलावृष्टि के कारण खुले आसमान के नीचे पेड़ों पर बसेरा कर रहे सैकड़ों पक्षियों की मौत हो गई। हालांकि, विनाश के इस मंजर के बीच मानवीय संवेदना भी देखने को मिली, जब स्थानीय ग्रामीण विनय विश्वकर्मा ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई घायल पक्षियों को बचाया और उन्हें अपने घर में आश्रय दिया।
तूफान की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में बिजली का एक विशालकाय नया टावर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। जिले भर में 100 से अधिक बिजली के खंभे उखड़ने और तार टूटने के कारण कई ग्रामीण इलाकों में ‘ब्लैकआउट’ की स्थिति बन गई है। बिजली गुल होने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर पेड़ गिरने से कई मार्गों पर आवागमन भी घंटों बाधित रहा।
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खलिहानों में रखी कटी हुई फसलें भीगने से भारी नुकसान हुआ है, वहीं गेहूं खरीदी केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटों के बंद होने से सरकारी खरीद की प्रक्रिया भी रुक गई है। फिलहाल, जिला प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा है और विद्युत विभाग की टीमें व्यवस्थाओं को बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति शुरू की जा सके।




