उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत (Harish Rawat) ने शनिवार (12 सितंबर 2026) को पार्टी के दो सबसे अहम सांगठनिक पदों से इस्तीफा देकर राज्य और देश की राजनीति में एक बड़ा धमाका कर दिया है। रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी सदस्यता और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का औपचारिक ऐलान किया है।
इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे मुख्य कारण उनके पूर्व ओएसडी (OSD) और वर्तमान में उनके निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना (Chandan Singh Jeena) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताबड़तोड़ छापेमारी है। ED की इस कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में बेनामी कैश, सोने के सिक्के, सोने की चेन और रोलेक्स जैसी कई महंगी लक्जरी घड़ियां जब्त की गई हैं।
आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है 2016 का VPDO भर्ती घोटाला, ED की रेड में क्या-क्या मिला, और पूर्व सीएम हरीश रावत (former cm harish rawat) ने इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाया है।
ED की रेड में क्या-क्या मिला? (बरामदगी के चौंकाने वाले आंकड़े)
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 सितंबर 2026 को देहरादून में कई परिसरों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत छापेमारी की। यह कार्रवाई 2016 में हुए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा घोटाले की जांच के सिलसिले में की गई थी।
ED द्वारा जारी बयान और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, चंदन सिंह जीना के आवास से जब्त की गई संपत्तियों का ब्योरा इस प्रकार है:
- बेनामी नगदी (Cash): चंदन सिंह जीना के घर से ₹32 लाख मूल्य का बेनामी कैश जब्त किया गया।
- सोने के आभूषण व सिक्के: कुल 200.5 ग्राम वजन के 13 सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन बरामद की गईं।
- लक्जरी घड़ियां: Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice जैसी दुनिया की सबसे महंगी ब्रांड्स की 12 लक्जरी घड़ियां जब्त की गईं।
- बैंक खाते फ्रीज: जांच एजेंसी ने जीना और उनके परिजनों के बैंक खातों में जमा ₹52.16 लाख की राशि को तुरंत प्रभाव से फ्रीज कर दिया है।
- फॉरेंसिक जांच: वित्तीय अनियमितताओं और लेन-देन की फॉरेंसिक पड़ताल के लिए जीना का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है।
ED का आरोप है कि चंदन सिंह जीना ने बिना किसी ज्ञात वैध आय स्रोत के नकद में भारी खर्च किए हैं, जिसका उनके पास कोई हिसाब नहीं है।
क्या है 2016 का VPDO भर्ती घोटाला?
इस पूरे विवाद की जड़ें वर्ष 2015-16 में आयोजित UKSSSC ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा से जुड़ी हैं। तत्कालीन हरीश रावत सरकार के दौरान UKSSSC का गठन उत्तराखंड के युवाओं को पारदर्शी और त्वरित सरकारी नौकरियां देने के उद्देश्य से किया गया था।
लेकिन परीक्षा के बाद बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और ओएमआर सीट (OMR Sheet) में हेरफेर की शिकायतें आईं:
- OMR शीट की चोरी व हेरफेर: जांच में पता चला कि परीक्षा समाप्त होने के बाद ओएमआर शीट को आयोग की सुरक्षित कस्टडी से निकालकर तत्कालीन सचिव के निजी आवास पर ले जाया जाता था।
- बिचौलियों की मिलीभगत: वहां से अधूरी भरी OMR शीटों को प्राइवेट कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को सौंपा जाता था, जो बिचौलियों से मिली अवैध रकम के बदले फर्जी गोले (options) भरते थे।
- अधिकारियों की भूमिका: इस धांधली में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष (वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी आरएस रावत), सचिव मनोहर सिंह कन्याल और परीक्षा नियंत्रक आरएस पोखरिया की संदिग्ध भूमिका सामने आई थी।
ED अब इस भर्ती घोटाले में हुए वित्तीय लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की परतों को खोल रही है।
हरीश रावत के कांग्रेस छोड़ने (इस्तीफा देने) की असली वजह
जब उनके PA के घर से करोड़ों की संपत्ति बरामद होने की खबर मीडिया में आई, तो harish rawat resign from congress चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया। हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
“नैरेटिव गढ़ने की कोशिश”
पूर्व सीएम हरीश रावत ने तंज कसते हुए लिखा कि जब भी लोग उनसे पूछते थे कि चुनाव कब होंगे, तो वे मजाक में कहते थे कि जब सीबीआई उनके दरवाजे पर दस्तक देगी, तभी चुनाव समझो। लेकिन इस बार उनके घर के बजाय उनके करीबी सहयोगी के घर दस्तक देकर एक राजनीतिक ‘नैरेटिव’ बनाने का प्रयास किया गया है।
“पार्टी की भ्रष्टाचार-विरोधी लड़ाई को नुकसान न पहुंचे”
रावत ने तर्क दिया कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा तंत्र और परीक्षाओं में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में अगर उनसे या उनके किसी सहयोगी से जुड़े विवाद के कारण पार्टी के संघर्ष को कोई ठेस पहुंचती है, तो वे ऐसा कभी नहीं चाहेंगे। इसी नैतिक वजह से उन्होंने CWC और PCC कार्यकारिणी से इस्तीफा दिया।
PA चंदन सिंह जीना का बचाव और खुली चुनौती
रावत ने चंदन सिंह जीना को सज्जन और मेहनती बताया। उन्होंने कहा, “यदि उन्होंने ओएमआर शीट में कोई गड़बड़ी की है और इसका सबूत है, तो मुझे इस कृत्य पर शर्मिंदगी होगी। लेकिन मुझे इस आरोप पर बिल्कुल विश्वास नहीं है।”
इसके साथ ही रावत ने खुली चुनौती दी कि अगर भर्ती मामले में उनके हस्तक्षेप का 1% भी प्रमाण किसी के पास हो, तो वह ईडी, सीबीआई या पुलिस को सौंपे। यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो कानून उन्हें सख्त सजा दे।
उत्तराखंड की राजनीति पर इसका असर
हरीश रावत का यह कदम उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा रणनीतिक दांव माना जा रहा है।
- डैमेज कंट्रोल की कोशिश: चुनाव से ठीक पहले अपनी पार्टी को किसी भी सीधे भ्रष्टाचार के आरोप से बचाने के लिए रावत ने तुरंत इस्तीफा देकर खुद को और पार्टी को रक्षात्मक स्थिति से बाहर निकालने की कोशिश की है।
- बीजेपी के लिए हथियार: सत्ताधारी दल भाजपा के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है, जिसका इस्तेमाल वे आगामी चुनावों में कांग्रेस के सुशासन और भ्रष्टाचार-विरोधी दावों के खिलाफ करेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. हरीश रावत ने कांग्रेस के किन-किन पदों से इस्तीफा दिया है?
उत्तर: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी सदस्यता और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी सरकारी पद पर नहीं थे, इसलिए सांगठनिक जिम्मेदारियों से अलग हुए हैं।
Q2. ED ने हरीश रावत के सहयोगी चंदन सिंह जीना के घर से क्या-क्या जब्त किया?
उत्तर: ED ने चंदन सिंह जीना के घर से ₹32 लाख नकद, 200.5 ग्राम वजन के सोने के 13 सिक्के और 7 चेन, तथा Rolex और Rado जैसी ब्रांड्स की 12 लक्जरी घड़ियां जब्त कीं। इसके अलावा ₹52.16 लाख के बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं।
Q3. यूकेएसएसएससी (UKSSSC) VPDO भर्ती घोटाला क्या है?
उत्तर: यह घोटाला वर्ष 2015-16 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग के अधिकारियों और कंप्यूटर एजेंसी ने मिलकर परीक्षा के बाद कस्टडी से OMR शीट निकालकर फर्जी तरीके से गोले भरकर चुनिंदा उम्मीदवारों को पास करवाया था।
Q4. चंदन सिंह जीना का हरीश रावत से क्या संबंध है?
उत्तर: चंदन सिंह जीना 2014 से 2017 के दौरान हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहने के समय उनके विशेषाधिकारी (OSD) थे। वर्तमान में वे हरीश रावत के निजी सहायक (PA) के रूप में कार्य कर रहे थे और उनके काफी भरोसेमंद माने जाते हैं।
Q5. अपने इस्तीफे पर हरीश रावत की क्या मुख्य प्रतिक्रिया रही?
उत्तर: हरीश रावत ने कहा कि उनके सहयोगी पर कार्रवाई कर उनके खिलाफ नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। वे नहीं चाहते कि पार्टी का भ्रष्टाचार-विरोधी संघर्ष उनके कारण कमजोर पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनका कोई दोष साबित हो तो वे सजा भुगतने को तैयार हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
हरीश रावत का कांग्रेस के सांगठनिक पदों से इस्तीफा देना (harish rawat resign from congress) सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले बड़े तूफ़ान का संकेत है। 2016 के VPDO भर्ती घोटाले में ED द्वारा जब्त की गई भारी नगदी और सोने के सिक्कों ने राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है। हालांकि हरीश रावत ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए खुद को सांगठनिक पदों से अलग कर लिया है ताकि पार्टी की साख पर आंच न आए, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा केंद्रीय भूमिका में रहने वाला है।




