फिल्म इंडस्ट्री में गीता बाली ने अपनी शोख़ अदा के साथ चलाया अलग ट्रेंड

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Geeta Bali’s Death Anniversary :50 और 60 के दशक में कई शानदार फिल्मों में अपनी चुलबुली शोख़ अदाओं से सबका दिल जीत लेने वाली एक्ट्रेस गीता बाली अपनी अदाकारी और खूबसूरती के लिए हमेशा याद की जाती हैं। ये वो दशक था जब गीता हमेशा चर्चा में रहती थीं न केवल अपनी फिल्मों के लिए बल्कि अपनी लव लाइफ के लिए भी तो चलिए आज जानते हैं गीता बाली के बारे में कुछ दिलचस्प बातें।

गीता बाली 30 नवंबर 1930 को  बँटवारे के पहले पंजाब में एक सिख परिवार में पैदा हुईं ,उनका बचपन का नाम हरकिर्तन कौर था वो सन 1952 में अपने भाई की ही फिल्म ‘राग रंग’ से अभिनय क्षेत्र में उतरीं और अभिनेता अशोक कुमार के साथ एक्टिंग की ।

क्यों हुए लोग गीता के दीवाने :-

शायद ये वो दौर था जब भारतीय फिल्म जगत को गीता बाली के शोख़ अंदाज़ की बहोत ज़रूरत थी क्योंकि उस वक़्त हीरोइन्स को केवल ट्रेजिडी के साथ फिल्मों में सराहना मिल रही थी लेकिन आम जन मानों एक अल्हड़ और चंचल अभिनेत्री को पर्दे पर देखने को बेताब था क्योंकि उस समय हॉलीवुड में रीटा हेरवर्थ अपनी मासूम और चंचल अदाओं से धूम मचा रहीं थीं और कहीं इसकी भनक लग गई थी गीता बाली को भी और वो इसी शोख़ रंग के साथ रुपहले पर्दे पर उतरीं और सबके दिलों पर छा गईं। उनकी इस अदा के लिए उन्हें ‘टॉम बॉय’ का ख़िताब भी मिला और अलबेला , बावरे नैन और सोहाग रात जैसी हिट फिल्मों के साथ अपने 10 साल के फिल्मी करियर में गीता ने 70 से भी ज़्यादा फिल्मों में काम किया।

प्यार पाने में क्यों हुई मुश्किल :-

बात करें गीता बाली की लव लाइफ के बारे में तो गीता बाली और पृथ्वीराज कपूर के बेटे अभिनेता शम्मी कपूर एक दूसरे को पसंद करते थे लेकिन शम्मी साहब की प्यार की शिद्दत थोड़ी ज़्यादा थी किसी हार्डकोर फैन ( Hardcore Fan) की तरह हालाँकि गीता उनसे उम्र में थोड़ी बड़ी थीं और उनका स्टारडम भी बड़ा था, उन्होंने अपने दौर के हर बड़े कलाकार के साथ काम किया था राज कपूर और पृथ्वीराज कपूर के साथ भी , राजकपूर के साथ गीता बाली ने ‘बावरे नैन’ की थी तो पृथ्वीराज कपूर के साथ फिल्म ‘आनंदमठ’ मे काम किया था।

कैसे प्यार परवान चढ़ा :-

गीता से शम्मी की मुलाकात साल 1955 में आई फिल्म ‘रंगीन रातें’ की शूटिंग के दौरान हुई थी, जिसमें शम्मी कपूर लीड रोल में थे और गीता कैमियो के लिए आई थीं। दोनों चंद महीनों की मुलाक़ातों में ही एक दूसरे को दिल दे बैठे पर उन्हें पता था कि घर वाले इस रिश्ते के लिए नहीं मानेंगे, गीता तो इतना डर रहीं थीं कि उन्होंने पहले तो शादी के लिए मना ही कर दिया था फिर शम्मी के बहोत मनाने के बाद वो राज़ी हुईं और माना कि वो भी उनके बिना जी नहीं सकतीं इसलिए दोनों ने 23 अगस्त 1955 को गुपचुप तरीके से मंदिर में शादी कर ली।

क्यों तोड़ दी कपूर खानदान की प्रथा:-

शम्मी कपूर से शादी के बाद भी गीता ने फिल्मों में काम करना नहीं छोड़ा और इसी वजह से उन्होंने कपूर खानदान की प्रथा भी तोड़ दी क्योंकि कपूर परिवार में नियम था कि उनके घर की बेटियाँ और बहुएँ भी शादी के बाद फिल्में छोड़ देती थीं पर गीता बाली ऐसा नहीं कर पाईं, एक्टिंग के लिए भी उनकी लगन प्यार से कम नहीं थी इसलिए वो अपनी कला का प्रदर्शन करने में कभी पीछे नहीं हटीं ,शादी के बाद आपके दो बच्चे हुए लेकिन गीता बाली का फ़िल्मी सफर ज़्यादा आगे न बढ़ सका ,महज़ 35 साल की उम्र में 21 जनवरी 1965 को चेचक की वजह से वो इस दुनिया को अलविदा कह गईं पर अपनी ज़िंदगी के आख़री साल भी वो फिल्म में काम कर रही थीं। 1963 में रिलीज़ हुई ‘जब से तुम्हें देखा’ उनकी आखिरी फिल्म थी इस वक़्त उनकी बेटी कुछ चार बरस की थी और गीता के जाने के बाद शम्मी कपूर ने 1969 में नीला देवी से शादी की ।

कौन थे गीता बाली के सचिव :-

यहाँ एक ख़ास बातआपको बताते चलें कि एक ज़माने में अनिल कपूर और बोनी कपूर के पिता यानी निर्माता सुरेंदर कपूर अभिनेत्री गीता बाली के सेक्रेटरी ( Secretary) हुआ करते थे और इसी वजह से जब वो फिल्म निर्माता बने तो उनकी हर फिल्म की नंबरिंग गीता बाली को श्रद्धांजलि देते हुए शुरू होती है ,ये परम्परा उनके बाद बेटे बोनी कपूर ने भी निभाई है।

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