Fuel Price Tax Cut: सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम घटाए और तेल निर्यात पर टैक्स बढ़ाया

Fuel Price Tax Cut : सरकार ने शुक्रवार को डीज़ल की कीमतों को लेकर एक बड़ा फ़ैसला लिया। पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर कम कर दी गई है, वहीं डीज़ल और एविएशन टर्बाइन फ़्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर ज़्यादा ड्यूटी लगा दी गई है।

CBIC के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने साफ़ किया कि पेट्रोल और डीज़ल पर टैक्स कम करने का मकसद आम आदमी को महंगाई से बचाना है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर भारत जैसे इंपोर्ट करने वाले देशों पर पड़ा है। इसलिए, सरकार ने कीमतें बढ़ने से रोकने के लिए टैक्स कम कर दिए हैं।

तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी कम होना भी एक बड़ी वजह है।

चतुर्वेदी ने बताया कि तेल कंपनियाँ (OMCs) लंबे समय से घाटे में चल रही हैं। इंटरनेशनल कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने के बावजूद, उन्होंने घरेलू कीमतें नहीं बढ़ाईं, जिससे अंडर-रिकवरी बढ़ गई। टैक्स में कटौती इसी दबाव को कम करने की एक कोशिश है।

एक्सपोर्ट पर ड्यूटी क्यों लगाई गई? Fuel Price Tax Cut

सरकार ने डीज़ल पर ₹21.5 प्रति लीटर और ATF पर ₹29.5 प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई है। इसका साफ़ मकसद देश में इन फ्यूल की सही उपलब्धता पक्का करना है। जब इंटरनेशनल कीमतें ज़्यादा होती हैं, तो कंपनियाँ ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने के लिए एक्सपोर्ट बढ़ा देती हैं, जिससे घरेलू सप्लाई पर असर पड़ता है।

हर 15 दिन में रिव्यू किया जाएगा। Fuel Price Tax Cut

सरकार ने यह भी साफ़ किया है कि विंडफॉल टैक्स, या स्पेशल एडिशनल एक्साइज़ ड्यूटी (SAED) का हर दो हफ़्ते में रिव्यू किया जाएगा। इससे बदलते हालात के हिसाब से जल्दी फ़ैसले लिए जा सकेंगे। अनुमान है कि इस टैक्स से पहले 15 दिनों में लगभग ₹1,500 करोड़ का रेवेन्यू आएगा।

सरकार पर रेवेन्यू का बोझ। Fuel Price Tax Cut

सरकार ने टैक्स कम करके राहत तो दी है, लेकिन इसका असर सरकारी खजाने पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि अगले 15 दिनों में लगभग ₹7,000 करोड़ का रेवेन्यू लॉस होगा। हालाँकि, सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में आम जनता को राहत देना ज़्यादा ज़रूरी है। हाल ही में US, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50% बढ़ गई हैं। इसी वजह से सरकार को यह बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।

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