EPS-95: प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ी एक जरूरी खबर सामने आई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन योग्य कर्मचारियों को राहत दिया जिनकी अधिक पेंशन की मांग कंपनी के प्रोविडेंट फंड के नियम पर आधारित होती है उसको खारिज कर दिया गया है। इस फैसले से उन कर्मचारियों के लिए उम्मीद बढ़ती हुई दिखाई दे रही है जो अपने वास्तविक सैलरी के आधार पर अपने पेंशन का लाभ पाना चाहते हैं।
19 अक्टूबर 2026 को दिए गए फैसले में अदालत ने ईपीएफओ के संबंध अस्वीकृति को रद्द कर दिया है और कर्मचारियों के संयुक्त विकल्प पर 8 सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने EPS-95 के पेंशन पर क्या कहा?
EPS-95 के मामले में मुंबई हाई कोर्ट में 40 से ज्यादा कर्मचारियों से जुड़े मामलों में क्या सवाल उठा की क्या किसी कंपनी के पीएफ ट्रस्ट के नियमों में वेतन सीमा तय होने के कारण कर्मचारियों का हायर पेंशन आवेदन खारिज किया जा सकता है? इस मामले में टाटा कम्युनिकेशंस अबाउट इंडिया रेमंड स्टील और बेस्ट अंडर टेकिंग से जुड़े कर्मचारी भी शामिल थे।
अदालत ने स्पष्ट बताया कि केवल पीएफ ट्रस्ट के नियमों में योगदान की सीमा होने या अधिक पेंशन के लिए संयुक्त विकल्प का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के आधार पर योग कर्मचारियों के आवेदन खारिज नहीं हो सकते हैं।
ये भी पढ़े: Employees Provident Fund Organisation (EPFO)
ईपीएफओ ने अपने आवेदन क्यों खारिज किए थे
कुछ कंपनियों के पास अपना पीएफ ट्रस्ट है इंटरेस्ट के नियम में योगदान की सीमा निर्धारित की गई थी या फिर अधिक पेंशन के लिए आवश्यक संयुक्त विकल्प का स्पष्ट प्रावधान नहीं दिया गया था। ईपीएफओ ने इन नियमों का हवाला देते हुए कर्मचारियों के आवेदन अस्वीकार कियाथे। कर्मचारियों ने अदालत में इस फैसले को चुनौती दी और कहा कि पीएफ ट्रस्ट में आंतरिक नियम होने के कारण उन्हें कर्मचारी पेंशन योजना के तहत उपलब्ध कानूनी विकल्प से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने इस मामले में कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए संबंधित आदेश को रद्द कर दिया।
क्या अब सभी कर्मचारियों को अधिक पेंशन मिल जाएगी?
EPS-95 के तहत इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि हर ईपीएफओ के सदस्य की पेंशन अपने आप बढ़ जाएगी। कर्मचारियों को योजना के लागू नियम और योग्यता के संबंध शर्तों को पूरा करना होगा। अधिक पेंशन पाने के लिए वास्तविक वेतन पर योगदान का रिकॉर्ड कर्मचारी और नियोक्ता का संयुक्त विकल्प और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए पुरानी आवेदन खारिश होने पर कर्मचारियों को अपने मामले की स्थिति और स्वीकृति के कारण की जांच कर लेनी चाहिए।
PF की वेतन सीमा में बदलाव का क्या असर है?
सितंबर 2026 में सरकार ने ईपीएफओ के अनिवार्य कवरेज वेतन सीमा₹15000 से बढ़कर ₹25000 प्रति माह कर दी थी। यह बदलाव योग्य कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा के दायरे से जुड़ा हुआ है हालांकि इसे पहले से लंबित हायर पेंशन की मांजूरी नहीं समझना चाहिए।
ये भी पढ़े: Taiwan Weighted Index: Taiwan शेयर बाजार आज 0.31% तक चढ़ा…
कर्मचारियों को अब क्या करना चाहिए?
जिन भी कर्मचारी का हायर पेंशन आवेदन ट्रस्ट के नियम के आधार पर खारिज हुआ है उन्हें अपना यूएन पीएफ पासबुक वेतन रिकॉर्ड और ईपीएफओ का आदेश देख लेना चाहिए। जरूर पढ़नी पर संबंधित कार्यालय पर जाकर विशेषज्ञ सलाह लेनी चाहिए। कुल मिलाकर मुंबई हाई कोर्ट का फैसला योग्य निजी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला है यह स्पष्ट करता है कि केवल पीएफ ट्रस्ट की वेतन सीमा के आधार पर हायर पेंशन का संयुक्त विकल्प खारिज नहीं किया जा सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ संबंधित कर्मचारियों की योग्यता और लागू नियम पर ही निर्भर होगी।




