सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की जमीनों की रजिस्ट्री के मुद्दे पर प्रशासन और पटवारी संघ के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। बुधवार को जिले के करीब 200 पटवारियों ने एकजुट होकर अपने कार्यालय भवन से कलेक्ट्रेट तक एक विरोध रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने सरकार की इस कार्यप्रणाली के खिलाफ रोष प्रकट किया और अपर कलेक्टर बीपी पांडे को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियों से अवगत कराया।
कार्रवाई और कानूनी पचड़े का डर
पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल ने विरोध की वजह स्पष्ट करते हुए बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री के मामलों को लेकर सीधी समेत प्रदेश के अन्य जिलों में भी पटवारियों पर कार्रवाई की जा रही है। संघ का मुख्य तर्क है कि इस योजना के तहत पटवारियों को ‘निष्पादन अधिकारी’ की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके चलते उन्हें संपत्तियों की प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल होना पड़ रहा है। पटवारियों को इस बात की गहरी आशंका है कि भविष्य में यदि जमीन के स्वामित्व को लेकर कोई विवाद या कानूनी मामला सामने आता है, तो इसके लिए उन्हें भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार
राज्य शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ-साथ पटवारियों को भी पंजीयन से जुड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं। हालांकि, पटवारियों का कहना है कि वे इस प्रक्रिया में अपनी व्यक्तिगत पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके भविष्य की किसी भी कानूनी मुसीबत का जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं।
तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर भी विरोध के सुर
पटवारी संघ का यह भी दावा है कि केवल पटवारी ही नहीं, बल्कि तहसीलदार और एसडीएम स्तर के अधिकारियों की तरफ से भी इस काम को करने से इनकार किए जाने की स्थिति बन रही है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर विवाद और अधिक गहराता जा रहा है।
मांगें पूरी होने तक बहिष्कार का ऐलान
अपर कलेक्टर बीपी पांडे ने पटवारियों का ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है और प्राप्त ज्ञापन को उचित स्तर पर अग्रेषित कर दिया जाएगा। वहीं, पटवारी संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी इन आशंकाओं और मांगों का उचित समाधान नहीं निकाला जाता, वे स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रहेंगे। पटवारियों के इस रुख से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित निमोल्क रजिस्ट्री अभियान के प्रभावित होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।




