अभिनय जगत पर दमदार भूमिकाओं से बिखरी है दीना पाठक की अनुपम छटा

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Birth Anniversary Of Actress Dina Pathak :अभिनय की बारीकी को समझने वाले, उस अदाकारा को नहीं भूल सकते जो अपने निभाए हर किरदार को परिपक्वता की ओर ले जाती थीं , उन्हें ये फ़र्क़ नहीं पड़ता था कि वो अभिनय कहाँ कर रही हैं ,थिएटर में छोटे पर्दे पर या बड़े पर्दे पर ,उनका निभाया हर किरदार मानस पटल पर जीवंत रह जाता था और वो बड़ी अपनी सी लगती थीं हर दफा नकारात्मक भूमिका में भी ,क्योंकि उस वक़्त यूँ लगता मानों कोई अपनी ही घर की सदस्य हमसे नाराज़ है और हमें इसे हर हाल में मनाना हैं ।

कम उम्र से जुडी अभिनय से :-

अभिनय जगत में माँ और दादी के रूप में अपनी अनुपम छठा बिखेरने वाली दीना पाठक आज के ही दिन 1922 को गुजरात के अमरेली में पैदा हुईं थीं और बहोत कम उम्र से इंडियन नेशनल थिएटर से जुड़ गईं थीं लेकिन एक्टिंग में और परिपक्व होने के लिए ग्रेजुएशन करने के बाद राशीकला पारेख से एक्टिंग सीखी, और अभिनय में नृत्य का तड़का लगाने के लिए शांति वर्धन से डांस भी सीखा।

कूट कूट कर देश भक्ति भरी थी दिल में :-

दीना ,सच्ची देश भक्त थी जिसका परिचय उन्होंनें भवानी थिएटर में अंग्रेजो के खिलाफ लोगों को अभिनय के ज़रिए जागरूक करके दिया था। ये एक फोल्क गुजराती थिएटर था।  गुजरती होने के नाते पहले तो दीना ने गुजराती थिएटर में ही काम किया था और थिएटर डायरेक्टर भी थी। उनकी शख़्सियत का एक ख़ास पहलू ये भी था कि वो एक एक्टिविस्ट और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन की प्रेसिडेंट भी थीं। 

दीना ने कैसे प्राप्त किया गौरव :-

दीना पाठक की दमदार एक्टिंग और आवाज़ का जादू दर्शकों के सर चढ़कर बोलता था उनकी उपस्थिति लोगों को सिनेमाघरों तक खींच लाती थी ये दीना पाठक की काबिलियत ही थी कि साल 1957 में देश के राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के सामने राष्ट्रपति भवन में परफॉर्म करने वाली वो पहली गुजराती महिला बन गई थीं।

60 साल का बेमिसाल फिल्मीं सफर :-

दीना ने अपने फिल्मीं करियर की शुरुआत 1948 में गुजराती फिल्म ‘कारियावार’ से की थी इसके बाद बॉलीवुड में,सत्यकाम, सात हिंदुस्तानी, द गुरु, मौसम, किनारा किताब, चितचोर, घरोंदा, भूमिका, जैसी फिल्मों में काम किया अपनी यंग एज में वो कई मुख़्तलिफ़ किरदार में नज़र आईं पर मेच्योरटी की तरफ बढ़ते हुए उन्होंने माँ और दादी-नानी के रूप में एक अलग पहचान बनाई और क़रीब 60 सालों तक अभिनय किया जिसमें गुजराती थिएटर के ड्रामा के अलावा 120 फिल्में भी दर्ज हैं। टीवी सिरिअल्स में भी उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी जिसमें ‘मालगुड़ी डेज़’ में ‘आया’ का किरदार और ‘खिचड़ी’ में बड़ी माँ की भूमिका कोई आज भी भूल नहीं सकता।

दीना की प्रेम कहानी :-

दीना पाठक की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्हें प्यार हुआ टेलर मास्टर बलदेव पाठक जी से जिनकी शॉप गेटवे ऑफ इंडिया के पास थी और वो एक्टर्स के कपड़े सिलने के लिए स्टूडियो आते-जाते रहते थे,वो भी अपने हुनर में इतने माहिर थे कि राजेश खन्ना और दिलीप कुमार उनके सिले कपड़े पहनते थे। आपको बता दें कि फिल्म ‘गुरु’ में राजेश खन्ना ने बलदेव पाठक का डिज़ाइन किया हुआ कुर्ता ही पहना था। ख़ैर सिलाई के बहाने दीना और बलदेव जी की मुलाक़ात हुई ,पहली नज़र में ही दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे और जल्द ही शादी कर ली।

बेटियाँ भी हैं बॉलीवुड की जानी मानी एक्ट्रेस :-

आपकी दो बेटियाँ हैं, जो आज बॉलीवुड का जाना माना चेहरा है जी हाँ दीना की बड़ी बेटी रत्ना पाठक शाह और छोटी बेटी सुप्रिया पाठक हैं जिन्हें हम कई फिल्मों में देख चुके हैं , यहाँ हम ये भी बता दें कि उनके जीवन साथी भी एक्टर हैं ,रत्ना पाठक बॉलीवुड के जाने माने कलाकार नसीरुद्दीन शाह की पत्नी हैं और सुप्रिया पाठक पंकज कपूर की पत्नी है। 

बलदेव पाठक 52 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए और अभिनय जगत में एक आला मक़ाम हासिल करके साल 2002 में 11 अक्टूबर को 80 साल की उम्र में दीना भी इस दुनिया से दूर चली गईं।

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