Dhirendra Shastri on Shree Ram : ‘कृष्ण टेढ़े… राम जी के 5 बाप’, धीरेन्द्र शास्त्री के बयान पर अखिलेश यादव बोले- बुलडोज़र क्यों चुप है?

Dhirendra Shastri on Shree Ram

Dhirendra Shastri on Shree Ram : सनातन की बात करने वाले… भगवान राम और कृष्ण की महिमा का गुणगान करने वाले… हिंदू धर्म खतरे में है और उसे बचाने का दावा करने वाले धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। पहले कहा कि भगवान कृष्ण टेढ़े हैं… और अब बोल दिया कि रामजी के पांच पिता थे।

इधर, ब्रज के संत नाराज हुए, तो उधर अखिलेश यादव ने भी कह दिया- ये धर्म की कथा है या विवादों की पटकथा? अखिलेश यादव ने ये भी पूछा कि धीरेंद्र शास्त्री किसके इशारे पर सनातन की दुकान चला रहे हैं?

धीरेन्द्र शास्त्री बोले- रामजी के 5 पिता थे

दरअसल, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने पहले कृष्ण के टेढ़े होने का दावा किया, तो अब उन्होंने अयोध्या के राजा दशरथ के बेटे भगवान राम को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिससे धार्मिक और सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दावा किया है कि भगवान राम के पांच पिता थे।

धीरेंद्र शास्त्री ने क्या दावा किया?

कथावाचन के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि रामजी के पांच पिता थे। इसे स्वीकार करना बड़ा मुश्किल है, लेकिन ये सत्य बात है। धीरेंद्र शास्त्री ने आगे दावा किया कि ये बात आपको किसी पुस्तक में लिखी नहीं मिलेगी। इससे पहले कि कोई उनसे पूछता कि इस तथ्य की जांच कहां से करे, धीरेंद्र शास्त्री ने कह दिया—ये मत पूछ लेना कि कहां मिलेगा। उन्होंने एक और बड़ा दावा किया कि जब राजा दशरथ के प्राण चले गए थे, तब भगवान राम ने उनकी अंत्येष्टि नहीं की थी।

यानी, एक धार्मिक कथा के मंच से धीरेंद्र शास्त्री भगवान राम के पांच पिता होने का दावा करते हैं, लेकिन दावे की पुष्टि के लिए किसी धार्मिक ग्रंथ का भी जिक्र नहीं करते। ऐसे में उन्होंने सीधे-सीधे कालिदास और गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महाग्रंथ रामचरितमानस पर भी सवाल खड़ा कर दिया।

क्योंकि जिस बात को खुद वक्ता यह कहकर पेश कर रहे हैं कि वह किसी लेख में नहीं मिलेगी, उसे सत्य बताने के लिए कम से कम प्रमाण और स्रोत तो सामने रखना ही चाहिए था। धर्म आस्था का विषय है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं की व्याख्या करते समय जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी हो जाती है—खासकर तब, जब बात करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र भगवान राम की हो।

अखिलेश यादव ने धीरेन्द्र शास्त्री की आड़ में भाजपा पर साधा निशाना

लेकिन पंडित धीरेंद्र शास्त्री के माफी मांगने के बाद ये मामला सियासी विवाद बन गया। धीरेंद्र शास्त्री की श्रीराम को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जमकर हमला बोला। अखिलेश ने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिना नाम लिए निशाना साधा।

एक्स पर उन्होंने लिखा कि ये सनातन विरोधी किसके कहने पर सक्रिय हैं? पहले भगवान श्रीकृष्ण के बारे में विवादित वीडियो आया और अब भगवान राम के पिता के बारे में अभद्रता की बात प्रसारित हो रही है। इसके राजनीतिक आकाओं को ये सब मंजूर होगा, लेकिन हमें अंश मात्र भी स्वीकार्य नहीं है।

इतना ही नहीं, उन्होंने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के अपराध में ऐसे लोगों के सभी कार्यक्रम रद्द किए जाने की मांग भी की। अखिलेश ने अपने पोस्ट में लिखा कि अब सच्चे सनातनी इनकी पर्ची लिखेंगे।

इसके बाद अखिलेश यादव ने भगवान कृष्ण का अपमान करने के आरोप में धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मीडिया के सामने आकर कहा कि अब सनातनी लोग चुप क्यों हैं? धीरेंद्र शास्त्री के बयान के बाद उनका बुलडोजर क्यों नहीं निकला? अभी तक बीजेपी के किसी बड़े नेता का बयान क्यों नहीं आया?

कृष्ण को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने क्या कहा था?

अब आपको बताते हैं कि ये पूरा विवाद शुरू कहां से हुआ। दरअसल, 29 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करते हुए कहा था, “हमारे राम सीधे हैं, तुम्हारे कृष्ण टेढ़े हैं।”

इसके बाद उन्होंने भगवान कृष्ण की शारीरिक मुद्रा और उनके व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए कहा कि उनका नाम, उनकी खोपड़ी, उनका चलना और खड़े होने का अंदाज भी टेढ़ा है। उन्होंने भगवान कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वे तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं, पांव के ऊपर पांव, कमर लचकाए और गर्दन टेढ़ी करके बंसी बजाते हैं।

लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और कृष्ण के कार्यों की तुलना करते हुए कहा कि बंसी बजाना खेल है, लेकिन धनुष उठाना खेल नहीं है। गाय चराना खेल है, लेकिन बंदरों को नचाना खेल नहीं है। उन्होंने अयोध्या को सीधा और वृंदावन को टेढ़ा भी बताया।

इसके बाद ब्रज के संतों और श्रद्धालुओं ने उनका विरोध शुरू कर दिया। बयान पर विवाद बढ़ा, तो धीरेंद्र शास्त्री को सफाई देनी पड़ी और हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी।

धर्म की व्याख्या या विवादों की पटकथा?

धीरेंद्र शास्त्री ने साफ किया कि उनका मकसद भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच किसी तरह का भेद पैदा करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह किसी संत के प्रचलित भाव और पद की व्याख्या कर रहे थे और उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया।

लेकिन यहां सवाल ये है कि जब बात करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हो, तो शब्दों के चयन में इतनी लापरवाही क्यों? अगर मकसद भगवान राम और कृष्ण की महिमा बताना था, तो एक की तुलना दूसरे से करने की जरूरत ही क्या थी? क्या भगवान राम की महानता बताने के लिए भगवान कृष्ण को टेढ़ा बताना जरूरी था? क्या श्रीकृष्ण की लीलाओं को समझाने के लिए उनकी तुलना भगवान राम से करनी जरूरी थी?

राम और कृष्ण, दोनों ही सनातन परंपरा के आराध्य हैं। दोनों के जीवन, लीलाओं और आदर्शों का अपना अलग महत्व है। ऐसे में एक को ऊंचा दिखाने के लिए दूसरे को कमतर बताने वाली भाषा आखिर किस तरह की धार्मिक व्याख्या है?

ये मामला अब देश में एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है—आखिर धर्म जोड़ने का माध्यम है या विवादों में उलझाने का? कथावाचकों को समझना होगा कि धर्म की व्याख्या करते हुए वे किस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और किन आधारों पर ऐसी पटकथाएं तैयार कर रहे हैं।

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