शराब घोटाला केस (Delhi Liquor Policy Case 2021) में बड़ी राहत देते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court Delhi) ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal, Former Delhi CM) और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia, Former Deputy CM Delhi) को CBI केस (CBI Liquor Scam Case) में बरी कर दिया है। शुक्रवार को कोर्ट ने कहा कि दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप पर्याप्त सबूतों के अभाव में साबित नहीं होते।
मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation – CBI) ने कुल 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि अदालत ने सभी के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार करते हुए उन्हें बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साजिश की जो कहानी पेश की गई, वह ठोस साक्ष्यों की बजाय अनुमानों पर आधारित थी।
कोर्ट से बाहर आते वक्त अरविंद केजरीवाल भावुक नजर आए। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने मिलकर यह “आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र” रचा। उनका आरोप था कि आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party – AAP) को खत्म करने के उद्देश्य से उसके शीर्ष पांच नेताओं को जेल भेजा गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और आरोपों को किसी ठोस गवाह या बयान से पुष्ट नहीं किया जा सका। केजरीवाल का नाम बिना पुख्ता सबूतों के जोड़ा गया, जो कि कानून के सिद्धांतों के विपरीत है, खासकर तब जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो।
इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि CBI ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसका सिद्धांत ठोस साक्ष्यों के बजाय मात्र अनुमान पर आधारित था। हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते। केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मुख्य आरोपी बताए गए कुलदीप सिंह को भी अदालत ने बरी कर दिया। कोर्ट ने हैरानी जताई कि उनके खिलाफ ठोस सामग्री के अभाव के बावजूद उन्हें प्रथम आरोपी क्यों बनाया गया। वहीं तेलंगाना जाग्रति पार्टी (Telangana Jagruthi Party) की अध्यक्ष के. कविता (K Kavitha) के वकील नितीश राणा ने भी कहा कि CBI की जांच प्रक्रिया (CBI Investigation Process) में गंभीर खामियां थीं और सभी आरोपियों को राहत मिलना न्याय की जीत है।
गौरतलब है कि अदालत ने न केवल आरोपियों को बरी किया, बल्कि CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। हालांकि यह फैसला केवल CBI द्वारा दर्ज मामले से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED Case) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले (Money Laundering Case Delhi Liquor Policy) में सुनवाई अभी जारी है।
