कोरबा। जीवों के प्रति अट्रट प्रेम मानव स्वभाव में बसा हुआ है। जिसका एक उदाहरण छत्तीसगढ़ के कोरवा जिला क्षेत्र अंतर्गत साजापानी से सामने आ रहा है। यहां एक हथिनी के जन्मे बच्चे का जन्मउत्सव मनाने के लिए ग्रामीण बड़ी तैयारी किए है। ग्रामीणों की इस अनोखी पहल की बड़ी चर्चा हो रही है। बताते है कि हाथियों से इस क्षेत्र के ग्रामीणों को अब तक कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
ज्ञात हो कि यह घटना वन्यजीवों के प्रति इंसानी प्यार और सह-अस्तित्व की एक बेहद खूबसूरत मिसाल है। जब ग्रामीण किसी हथिनी के बच्चे (गजशावक) का जन्मोत्सव मनाने के लिए एकजुट होते हैं, तो यह न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक बड़ा संदेश भी देता है। इस तरह के आयोजनों के कई सकारात्मक पहलू और प्रभाव होते हैं।
ऐसे होते है लाभ
यह आयोजन इंसानों और हाथियों के बीच होने वाले टकराव को कम करने में मदद करता है। नई पीढ़ी खेल-खेल में और उत्सव के माध्यम से वन्यजीवों की रक्षा करना सीखती है। गांवों का एक साथ आना ग्रामीण एकजुटता और आपसी भाईचारे को मजबूत करता है। हाथी जंगलों के घनत्व को बनाए रखने और नए पौधों को उगाने में मदद करते हैं। भारतीय संस्कृति में हाथी को सौभाग्य, बुद्धि और बप्पा (गणेश जी) का रूप माना जाता है।
सात गांवों के ग्रामीण 25 को कर रहे भव्य आयोजन
जानकारी के तहत ग्रामीण हाथी के बच्चे का जन्म उत्सव इतने धूम-धाम से मानने की तैयारी कर रहे है। जिस तरह से गांव में किसी बच्चे के जन्म पर निभाई जाने वाली परंपरा होती है। उसी के तहत ग्रामीण जंगल में जन्मे हाथी के बच्चे के लिए जन्म उत्सव मनाने जा रहे है। इसके लिए ग्रामीण पैसे और अनाज जन सहयोग से एकत्रित कर रहे है। 25 अक्टूबर को हथिनी के बच्चे के जन्म उत्सव पर पकवान बनाए जाऐगे और भंडारे का अयोजन होने जा रहा है। इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को आमंत्रित करने के साथ ही ग्रामीण जन एकत्रित होकर उत्सव मनाऐगे और भंडारे में शामिल होगे।
इन गावों के ग्रामीण कर रहे आयोजन
हथिनी के बच्चे का जन्म उत्सव मनाने के लिए मां कांशीरानी नवयुवक सेवा समिति साजापानी तैयारी कर रहा है। इस आयोजन में जामपानी, पहाड़गांव, रामभांठा, लबेद, घुईचुआ और काशीपानी के लोग भी शमिल हो रहे है और सभी के सहयोग से यह भव्य आयोजन होने जा रहा है। यहां सबसे अंहम बात यह है कि यह आयोजन वन जीवों के प्रति प्रेम और समपर्ण एवं वन जीवों के लगाव की मिशाल पेश करेगा।




