कम्प्यूटर, आईटी ने आज भारत की बदली ऐसे तस्वीर, पूर्व पीएम राजीव गांधी बने थें इसके वास्तुकार

नई दिल्ली। कम्प्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी ने भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है, जिससे न केवल आर्थिक सफलता मिली है, बल्कि आम नागरिकों से लेकर कॉर्पाेरेट जगत तक काम में अभूतपूर्व सरलता आई है। 2026 तक, भारत का आईटी क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 9.3 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और वैश्विक आईटी आउटसोर्सिंग बाजार में 56 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखता है।

देश में कंप्यूटर और आधुनिक संचार तकनीक की रखी थी नींव

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भारत में सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति का जनक कहा जाता है क्योंकि उन्होंने 1980 के दशक के मध्य में, जब भारत में कंप्यूटर को लेकर हिचकिचाहट थी, तब देश में कंप्यूटर और आधुनिक संचार तकनीक की नींव रखी थी। 1984 में 40 वर्ष की आयु में प्रधानमंत्री बनने वाले वे सबसे युवा नेता थे और उनका दृष्टिकोण भारत को 21वीं सदी में तकनीकी रूप से सक्षम बनाने का था।

इस तरह से कामों में आई सरलता

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर- आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर ने सेवाओं को सुलभ बना दिया है। यूपीआई ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े लेन-देन तक को तत्काल और कागज-रहित बना दिया है।
सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण- ई-गवर्नेंस (जैसे- रेलवे टिकट, पासपोर्ट, आयकर रिटर्न) ने फाइलों के बोझ को कम किया है और भ्रष्टाचार को घटाया है।
कार्यकुशलता में एआई का प्रभाव- 2026 में, एआई के कारण काम अधिक सटीक और तेज हो गया है, जिससे मैनुअल डेटा एंट्री और रूटीन बैक-ऑफिस काम की जरूरत कम हो गई है।
दूरस्थ कार्य- हाई-स्पीड इंटरनेट के कारण वर्क-फ्रॉम-होम और हाइब्रिड मॉडल ने काम को भौगोलिक सीमाओं से मुक्त कर दिया है।

आईटी क्षेत्र की सफलता

आर्थिक विकास- वित्त वर्ष 2024 तक भारतीय आईटी उद्योग का राजस्व लगभग 254 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जो 54 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है।
निर्यात में वृद्धि- सॉफ्टवेयर और आईटी-सक्षम सेवाओं का निर्यात 200 अरब डॉलर के पार हो गया है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम- भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम्स में से एक बन गया है, जिसमें फिनटेक, एडटेक और में नवाचार हो रहा है।
ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स- भारत अब केवल आउटसोर्सिंग हब नहीं, बल्कि ग्लोबल इनोवेशन हब बन गया है, जहाँ कंपनियाँ साइबर सुरक्षा और एआई समाधान विकसित कर रही हैं।

भविष्य की राह (2026 और उससे आगे)

एआई और क्लाउड का दौर- 2026 में तकनीक का जोर एआई मशीन लर्निंग, और क्लाउड टेक्नोलॉजी पर है। गूगल और अन्य दिग्गज कंपनियाँ भारत में डेटा सेंटर के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।
सेमीकंडक्टर मिशन- भारत का सेमीकंडक्टर निर्माण में निवेश 2026 तक 10 लाख नई नौकरियां पैदा करने की क्षमता रखता है।

निष्कर्ष

कंप्यूटर और आईटी ने भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाया है, जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और व्यवसाय में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आई है। एआई और क्लाउड के आगमन से अब काम और भी स्मार्ट और तेज हो गया है।

इस लिए कहे गए आईटी जनक

कंप्यूटर क्रांति की शुरुआत- राजीव गांधी ने 1980 के दशक में कंप्यूटरों पर आयात शुल्क कम किया, जिससे कंप्यूटर और उनके पुर्जे भारत में सस्ते हो गए।
टेलीकॉम और सी-डॉट की स्थापना- उन्होंने अगस्त 1984 में स्वदेशी दूरसंचार तकनीक विकसित करने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स यानि सी-डॉट की स्थापना की, जिसने गांवों तक संचार नेटवर्क पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पीसीओं क्रांति- राजीव गांधी के प्रयासों से ही ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन पहुंचाने के लिए देश भर में पीसीओं बूथों का जाल बिछाया गया, जिससे आम जनता को दुनिया से जुड़ने का मौका मिला।
ई-गवर्नेंस और आधुनिकीकरण- उन्होंने सरकारी कार्यों में कंप्यूटर के उपयोग को बढ़ावा दिया, जिसमें 1986 में रेलवे में कम्प्यूटरीकृत टिकट बुकिंग की शुरुआत प्रमुख है।
शिक्षा और युवा शक्ति- उन्होंने तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के तहत कंप्यूटर साक्षरता पर जोर दिया। उनके इन दूरदर्शी कदमों के कारण, उन्हें सही मायने में डिजिटल इंडिया का वास्तुकार माना जाता है।

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