Daldal Web Series Review: कैसी है भूमि पेडनेकर की नई क्राइम थ्रिलर?

Bhumi Pednekar as DCP Rita Ferreira in Daldal web series poster and scenes.

प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई Daldal Series Review के नजरिए से देखें तो यह एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नजर आता है। भूमि पेडनेकर ने इस सीरीज के जरिए डिजिटल स्पेस में एक दमदार महिला पुलिस अधिकारी की भूमिका में कदम रखा है। हालांकि, मुंबई के अंधेरे गलियारों और अपराध की दुनिया को समेटने की कोशिश में यह थ्रिलर अपनी लय खोती नजर आती है।

Daldal Series Review: क्या है कहानी का आधार?

सीरीज की शुरुआत डीसीपी रीता फरेरा (भूमि पेडनेकर) के साथ होती है, जो मुंबई के रेड लाइट एरिया में एक अंडरकवर मिशन को अंजाम दे रही हैं। रीता एक ऐसी पुलिस ऑफिसर हैं जो न केवल बाहरी अपराधियों से लड़ रही हैं, बल्कि अपने निजी जीवन के बिखराव और अतीत के मानसिक आघात (trauma) से भी जूझ रही हैं। कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब शहर में एक के बाद एक सीरियल किलिंग्स होने लगती हैं।

Daldal Prime Video Series Official Stills and Review

इन हत्याओं का तरीका काफी खौफनाक है, जहां पीड़ितों के मुंह में कुछ ठूंसकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है। जांच के दौरान रीता का सामना अपने ही जैसे एक टूटे हुए व्यक्तित्व वाले अपराधी से होता है। विष धमीजा की किताब ‘भेंडी बाजार’ पर आधारित यह सीरीज यह दिखाने की कोशिश करती है कि कैसे एक ही तरह के पितृसत्तात्मक समाज और घरेलू हिंसा से निकले दो लोग कानून के अलग-अलग किनारों पर खड़े हो जाते हैं।

अभिनय और किरदारों की गहराई

भूमि पेडनेकर ने रीता के किरदार में गंभीरता लाने की पूरी कोशिश की है। उनकी उदासी और काम के प्रति उनका जुनून पर्दे पर दिखता है, लेकिन पटकथा की सीमाओं के कारण उनका किरदार एक ही इमोशन (गुस्सा और चिड़चिड़ापन) तक सीमित रह जाता है। वहीं, गीता अग्रवाल शर्मा ने सब-इंस्पेक्टर इंदु म्हात्रे के रूप में एक बार फिर अपनी स्वाभाविकता से प्रभावित किया है।

सीरीज का एक सरप्राइज पैकेज आदित्य रावल हैं। एक ड्रग एडिक्ट और संदिग्ध अपराधी के रूप में उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली है। उनके चेहरे की शून्यता और शारीरिक भाषा कहानी में आवश्यक तनाव पैदा करती है। हालांकि, मुख्य विलेन और अन्य पुरुष किरदारों को जिस तरह से लिखा गया है, वे कई बार ‘कैरीकेचर’ या फिल्मी विलेन की तरह महसूस होते हैं।

निर्देशन और स्क्रीनप्ले में कहां हुई चूक?

अमृत राज गुप्ता के निर्देशन में बनी इस सीरीज के साथ सबसे बड़ी समस्या इसका ‘मेल गेज’ (पुरुष दृष्टिकोण) है। हालांकि यह एक महिला केंद्रित कहानी है, लेकिन इसे लिखने वाले पुरुषों ने महिला पात्रों की जटिलताओं को सतही तौर पर दिखाया है। रीता का अपने बॉस के सामने ‘टैंट्रम’ दिखाना या बार-बार अपनी मृत मां के भ्रम (hallucinations) देखना कहानी को थोड़ा नाटकीय बना देता है।

Bhumi Pednekar as DCP Rita Ferreira in Daldal web series

इसके अलावा, सीरीज का पेसिंग (रफ्तार) काफी असमान है। सात एपिसोड्स में फैली यह कहानी कई बार दोहराव वाली लगती है। खोजी पत्रकारिता वाले सब-प्लॉट को और बेहतर तरीके से बुना जा सकता था, जो अंत में केवल एक फुटनोट बनकर रह जाता है। तकनीकी तौर पर देखें तो सिनेमैटोग्राफी मुंबई के माहौल को पकड़ने की कोशिश करती है, लेकिन कुछ जगहों पर खराब वीएफएक्स (VFX) और ग्रीन स्क्रीन का काम खटकता है।

क्या यह देखने लायक है?

‘दलदल’ एक ऐसी सीरीज है जो एक बेहतरीन क्राइम ड्रामा बन सकती थी, लेकिन यह अपनी ही बुनी हुई उलझनों में फंसकर रह गई। अगर आप भूमि पेडनेकर के प्रशंसक हैं और डार्क क्राइम थ्रिलर पसंद करते हैं, तो इसे एक बार देखा जा सकता है। हालांकि, ‘दहाड़’ या ‘पाताल लोक’ जैसी गहराई की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को यह थोड़ी निराशाजनक लग सकती है।

अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *