सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले के केशवाही गांव में गुरुवार सुबह एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के तहत ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन के रास्ते में आ रहे 8 पक्के मकानों को बुलडोजर से ढाह दिया गया। इस कार्रवाई से इलाके में सनसनी फैल गई, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों ने मुआवजे और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सुबह 9 बजे शुरू हुई संयुक्त कार्रवाई
प्रशासन और रेलवे की संयुक्त टीम सुबह करीब 9 बजे भारी पुलिस बल के साथ केशवाही गांव पहुँची। इस कार्रवाई का नेतृत्व बहरी के एसडीएम राकेश शुक्ला, तहसीलदार हिमांशु शुक्ला और थाना प्रभारी राजेश पांडे ने किया, जिनके साथ रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन द्वारा हटाए गए मकानों में मनोज सोनी, विजय द्विवेदी और चंद्रिका द्विवेदी समेत कुल 8 लोगों के घर शामिल हैं।
प्रशासन और पुलिस का पक्ष: “दिया जा चुका है मुआवजा”
कार्रवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध करने का प्रयास किया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि, बहरी थाना प्रभारी राजेश पांडे और एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया। पुलिस का कहना है कि रेलवे नियमों के तहत प्रभावित परिवारों को पहले ही मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है, जिसके बाद ही यह कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई। अधिकारियों के समझाने के बाद ग्रामीण शांत हुए और कार्रवाई आगे बढ़ी।
ग्रामीणों का गंभीर आरोप- “बिना अधिग्रहण और मुआवजे के तोड़े मकान”
दूसरी तरफ, स्थानीय ग्रामीण नृपेंद्र द्विवेदी ने प्रशासन और रेलवे के दावों को सिरे से खारिज किया है। उनका आरोप है कि रेलवे और प्रशासन मनमाने तरीके से उन जमीनों पर भी बुलडोजर चलवा रहा है, जिनका न तो विधिवत अधिग्रहण किया गया है और न ही जिनका मुआवजा मालिकों को मिला है। इस मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों ने तुरंत एसडीएम को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
अब रिकॉर्ड के आधार पर होगी आगे की जाँच
ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों और शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े तमाम पुराने रिकॉर्ड की बारीकी से जाँच की जाएगी। यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी या बिना मुआवजे के मकान तोड़े जाने की पुष्टि होती है, तो उसके आधार पर आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी।




