रीवा: शहर में बारिश का दौर थमने के बाद अब खराब और गड्ढों से भरी सड़कें रीवावासियों के लिए एक नई और गंभीर मुसीबत बन गई हैं। सड़कों से गुजरने वाले वाहनों के कारण उड़ने वाले धूल के गुबारों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे शहर की आबोहवा लगातार जहरीली होती जा रही है। हालात यह हैं कि हवा में मौजूद सूक्ष्म धूल कणों का स्तर मानक से कई गुना आगे निकल चुका है।
कॉलेज चौराहे से मॉडल रोड तक फैला धूल का साम्राज्य
शहर के मुख्य मार्गों, विशेषकर कॉलेज चौराहे से लेकर मॉडल रोड और अन्य व्यस्ततम रास्तों पर धूल के कारण विजिबिलिटी और एयर क्वालिटी दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। स्थिति इतनी विकट है कि पार्टिकुलेट मैटर यानी $PM_{10}$ का सामान्य स्तर, जो कि 50 माइग्रोग्राम प्रति घनमीटर होना चाहिए, वह बढ़कर सीधे 200 से 250 माइग्रोग्राम प्रति घनमीटर तक जा पहुँचा है। विशेष रूप से समान तिराहा और सिविल लाइन क्षेत्र में यह खतरनाक स्तर अधिकतम 246 माइग्रोग्राम प्रति घनमीटर तक दर्ज किया गया है।
बाइक चालकों और राहगीरों पर सबसे बड़ा खतरा
हवा में फैले इन सूक्ष्म और जहरीले धूल कणों का सबसे बुरा प्रभाव उन लोगों पर पड़ रहा है जो खुले में सफर करते हैं। बाइक चालकों, पैदल यात्रियों और सड़क किनारे अपनी दुकानें या मकान बनाकर रहने वालों को सीधे तौर पर इन धूल के गुबारों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज चौराहा और फ्लाईओवर के पास तो हालात इतने बदतर हो गए हैं कि वहाँ से पैदल या दोपहिया वाहन से गुजरना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।




