Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल गर्माता जा रहा है। बिहार चुनाव में एनडीए और महागठबंधन दोनों में ही बागियों ने चुनावी समीकरण बिगाड़ दिया है। इस चुनाव में बागियों की दखल निर्णायक भूमिका निभा सकती है। यानी कि बिहार चुनाव में किसे सत्ता मिलेगा, ये बागी नेता ही तय करेंगे। महागठबंधन में फ्रेंडली फाइट की वजह से बागियों द्वारा वोट चोरी होने का खतरा ज्यादा है।
बिहार में एक-एक वोट का है महत्व
बिहार में पिछले विधानसभा चुनाव में महज 0.3 प्रतिशत वोटों का अंतर एनडीए को सत्ता दिलाने में अहम साबित हुआ, जबकि महागठबंधन इससे दूर रह गया। इसके चलते, अब हर वोट का महत्व और भी बढ़ गया है, खासकर उन सीटों पर जहां बागी उम्मीदवार सक्रिय हैं या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं।
बागियों पर निर्भर है बिहार चुनाव की जीत-हार
बिहार में लगभग 30 से अधिक ऐसी सीटें हैं, जहां बागी उम्मीदवार या पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण चुनावी समीकरण बदल रहे हैं। इन बागियों का मुख्य असर यह है कि वे वोट के विभाजन का कारण बन सकते हैं, जिससे चुनाव का परिणाम काफी हद तक प्रभावित हो सकता है।
राजद ने 27 तो जदयू ने 16 बागियों को पार्टी से निकाला
महागठबंधन, जिसमें राजद प्रमुख भूमिका में है, इन बागियों को रोकने या मनाने की कोशिश कर रहा है। राजद ने अब तक 27 बागियों को बाहर का रास्ता दिखाया है, जबकि जेडीयू ने भी 16 नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि दल अपने वोट बैंक को सुरक्षित करने और बागियों से निपटने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं।
बिहार चुनाव में इन सीटों पर रहेगी सबकी नजर
- मधेपुरा – यहां निर्दलीय प्रत्याशी प्रणव प्रकाश और अजय रंजन ने राजद और जदयू के उम्मीदवारों के बीच जंग को दिलचस्प बना दिया है। यादव-मुसहर-महादलित वोटों का बंटवारा इस सीट को खास बना रहा है।
- मुजफ्फरपुर – बीजेपी के अजय निषाद के करीबी शंभू पटेल ने उनके लिए सिरदर्द खड़ा कर दिया है। वहीं, कांग्रेस से टिकट न मिलने के बाद डॉ. अमरेश चौधरी ने निर्दलीय मैदान में उतरकर स्थिति को और जटिल कर दिया है।
- वैशाली – यहां राजद और कांग्रेस दोनों के बीच उलझन है, और निर्दलीय विजय मंडल अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, जो यादव और अतिपिछड़ा वोट बैंक पर प्रभाव डाल रहे हैं।
- नवादा – निर्दलीय रवि सिंह एनडीए का सिरदर्द बन गए हैं, जिन्होंने जदयू छोड़कर बागी रुख अपना लिया है।
- सासाराम और बक्सर – जदयू के नेता चंद्रभूषण तिवारी और निर्दलीय उम्मीदवार रहेम खान जैसी व्यक्तिगत ताकतें मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही हैं।
बिहार चुनाव में प्रतिष्ठा की लड़ाई
बिहार में बागियों का बढ़ता प्रभाव चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से बदल रहा है। हर बागी उम्मीदवार की सफलता या असफलता, खासकर उन सीटों पर जहां भाजपा, जदयू, राजद या कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है, निर्णायक साबित हो सकती है। दल अपनी-अपनी रणनीति मजबूत कर रहे हैं, लेकिन बागी वोटों का बंटवारा इन चुनावों का मुख्य फोकस बना रहेगा। यह चुनाव उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा का सवाल है।
यह भी पढ़े : Bhopal Love Jihad Case : मुस्लिम युवती पर धर्म बदलवाने का आरोप लगाने वाला खुद भी दागी, जा चुका है जेल
