Bhopal 90 Degree Overbridge: भोपाल के चर्चित 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज (Railway Over Bridge) मामले में निलंबित इंजीनियरों को बहाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह की टिप्पणी के बाद लोक निर्माण विभाग (Public Works Department) अब बहाली आदेश (Reinstatement Order) जारी करने जा रहा है।
Bhopal 90 Degree Overbridge: लोक निर्माण विभाग (Public Works Department) ने भोपाल के चर्चित 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज (Railway Over Bridge) प्रकरण में निलंबित सभी सात इंजीनियरों को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें दो चीफ इंजीनियर स्तर के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।विभागीय सूत्रों के अनुसार, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बहाली संबंधी फाइल पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारी जून 2025 से सस्पेंड (Suspended) चल रहे हैं, इसलिए उन्हें तुरंत सेवा में वापस लिया जाए। इसके बाद विभाग ने औपचारिक आदेश जारी करने की तैयारी कर ली है।
बहाली के बाद नई पदस्थापना
सस्पेंशन (Suspension) की अवधि में दोनों तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियरों को ईएनसी कार्यालय से जोड़ा गया था, जबकि बाकी इंजीनियर भोपाल के विभिन्न फील्ड कार्यालयों में अटैच थे। अब बहाली के बाद सभी अधिकारियों को ईएनसी कार्यालय (ENC Office) में पदस्थापित करने की योजना है।
पहले जारी हो चुके थे आरोप-पत्र
विभाग ने पहले सभी सात इंजीनियरों को आरोप-पत्र (Charge Sheet) जारी कर उनके जवाब मांगे थे। डिजाइन (Design) से जुड़े अधिकारियों ने अपने जवाब में किसी भी गलती से इनकार किया था। विभागीय समीक्षा के बाद अधिकांश अधिकारियों को बिना अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई के बहाल करने का फैसला लिया गया।
इन अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई
मामले में जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी, उनमें चीफ इंजीनियर संजय खांडे, चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, प्रभारी ईई शबाना रज्जाक, सहायक यंत्री शानुल सक्सेना, उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा, प्रभारी एसडीओ रवि शुक्ला, प्रभारी ईई जावेद शकील और सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री एमपी सिंह शामिल हैं। आरोप था कि रेलवे की मंजूरी (Railway Approval) के बिना ड्राइंग अनुमोदन और डिजाइन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई।
विभागीय जांच जारी रहेगी
पीडब्ल्यूडी (PWD) ने स्पष्ट किया है कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) आगे भी चलेगी। इसके लिए अलग जांच अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो सभी दस्तावेजों, बयानों और साक्ष्यों की छानबीन करेगा। यह प्रक्रिया अगले चार से पांच महीने तक चल सकती है। विशेष रूप से तत्कालीन चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, एसडीओ रवि शुक्ला और उप यंत्री उमाशंकर मिश्रा के मामलों में बहाली के साथ-साथ जांच भी जारी रहेगी, जबकि अन्य अधिकारियों को फिलहाल राहत मिल गई है।
ब्रिज का दोबारा हो रहा री-डिजाइन
ऐशबाग क्षेत्र में स्थित इस रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का तीखा 90 डिग्री मोड़ शुरू से ही विवादों में रहा है। यातायात विशेषज्ञों (Traffic Experts) ने इसे खतरनाक बताया था। वर्तमान में पीडब्ल्यूडी और रेलवे मिलकर ब्रिज के टर्निंग हिस्से का री-डिजाइन (Re-design) तैयार कर रहे हैं, हालांकि निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है। इससे स्थानीय लोगों को रोजाना यातायात की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।गौरतलब है कि मामले के सामने आने के बाद मंत्री राकेश सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से तकनीकी जांच कराई थी। रिपोर्ट में ब्रिज पर 35-40 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार को जोखिमभरा बताया गया था।




