Bhojshala Vivad: हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट में कहा – केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति, ASI बदलें 2003 का आदेश

Bhojshala Vivad: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी गई। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में जोरदार मांग की कि भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल किया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए।

Bhojshala Vivad: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला (Bhojshala) परिसर को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court) में एक बार फिर गर्म हो गया। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (Hindu Front for Justice) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने एएसआई (ASI) को भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश देने की मांग की। साथ ही केवल हिंदुओं को वहां पूजा-अर्चना की अनुमति देने का आग्रह भी किया गया।

ASI के 2003 के आदेश को दी गई चुनौती

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष एएसआई (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी। इस आदेश में हिंदुओं को हर मंगलवार को पूजा और मुसलमानों को हर शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। वकील जैन ने तर्क दिया कि यह आदेश प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act 1958) का खुला उल्लंघन है। कानून के अनुसार किसी संरक्षित स्मारक का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत नहीं किया जा सकता।

हिंदुओं के पूजा अधिकार का उल्लंघन का आरोप

हिंदू पक्ष ने अदालत में कहा कि एएसआई (ASI) के आदेश के कारण लागू व्यवस्था हिंदुओं के पूजा के अधिकार का सीधा उल्लंघन कर रही है। मुस्लिम पक्ष की उस आपत्ति को भी खारिज किया गया जिसमें कहा गया था कि यह मामला जनहित याचिका नहीं बल्कि सिविल विवाद है और इसे सिविल कोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए।

मुस्लिम पक्ष का Places of Worship Act वाला तर्क

मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम 1991 (Places of Worship Act 1991) का हवाला देते हुए दावा किया कि 15 अगस्त 1947 को यह स्थल मस्जिद के रूप में मौजूद था, इसलिए इसका धार्मिक चरित्र बदला नहीं जा सकता। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब दिया कि यह कानून भोजशाला (Bhojshala) परिसर पर लागू ही नहीं होता क्योंकि यह एएसआई (ASI) द्वारा संरक्षित प्राचीन स्मारक है।

“भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं”

दूसरे हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश वकील मनीष गुप्ता ने अदालत को बताया कि इस विवादित स्थल में सामान्य मस्जिदों की तरह न तो मीनार है और न ही वजूखाना। उन्होंने जोर देकर कहा कि भोजशाला (Bhojshala) मूल रूप से एक मंदिर है, मस्जिद नहीं। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 मई को तय कर दी है।

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