हमारे देश भारत के अलावा दुनियाभर में Antimicrobial Resistance तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है जिसका मतलब है कि बैक्टीरिया वायरस फंगस और अन्य सूक्ष्म जीव समय के साथ-साथ दवा के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर सकते हैं।

Antimicrobial Resistance क्या है और ये कैसे होती है?
एंटीमाइक्रोबॉयल रेजिस्टेंस ऐसी स्थिति होती है, जब संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्म जीव से दवा का असर कम या पूरी तरह से खत्म हो जाता है। खास तौर पर एंटीबायोटिक का बार-बार या गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर बैक्टीरिया उनमें बदलाव को विकसित कर लेते हैं। इसके बाद वही दवा पहले की तरह प्रभावि नहीं होती है और इलाज करना कठिन हो जाता है।
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AMR बढ़ने के क्या है प्रमुख कारण
बिना डॉक्टर की सलाह की एंटीबायोटिक दावों को लेना दवा का पूरा कोर्स बीच में छोड़ देना और जरूरत ना होने पर एंटीबायोटिक का उपयोग करना इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। इसके अलावा पशुपालन और कृषि क्षेत्र में एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल में भी दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया तेजी से फैलते जा रहा है। यही बचा है कि दुनिया की कई देशों में यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रहीहै।
इससे स्वास्थ्य पर कितना गंभीर असर पड़ता है?
Antimicrobial Resistance जब बढ़ जाती है तो सामान्य इन्फेक्शन का इलाज भी कठिन हो जाता है। इससे पेशेंट को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है और इलाज की लागत भी बढ़ने लगती है इसके अलावा सर्जरी कैंसर उपचार और अंग प्रत्यय रोपण जैसे गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
भारत और दुनिया के लिए क्यों है बड़ी चुनौती?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ-साथ कई सारे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के द्वारा एंटीमाइक्रोबल रेजिस्टेंस को वैश्विक सार्वजनिक साथ संकट माना गया है। भारत में भी एंटीबायोटिक दावों का उपयोग काफी ज्यादा है डॉक्टर का कहना है कि बिना पर्ची दवा खरीदने की प्रवृत्ति और खुद से दवा लेकर समस्या को और बढ़ा देते हैं लोग। इसलिए हॉस्पिटल डॉक्टर और आम लोगों को एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होतीहै।
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AMR से बचाव के लिए क्या करना चाहिए
डॉक्टर सलाह देते हैं की एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर के सलाह पर ही लेना चाहिए और एंटीबायोटिक के दवा का पूरा कोर्स भी पूरा करना चाहिए। वायरल संक्रमण जैसे सामान्य सर्दी फ्लो में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए क्योंकि इन बीमारियों का एंटीबायोटिक असर नहीं कर पातीहै।




