Akhilesh Yadav Troll on Ghuspaithiye : 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के एक बयान ने उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक सियासी भूचाल ला दिया है। अखिलेश यादव ने घुसपैठियों को लेकर पूछे गए सवाल पर मीडिया के सामने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नाराज हो गए। उन्होंने अखिलेश यादव से उत्तराखंड की जनता से माफी मांगने को कहा है।
क्या है घुसपैठिये वाला विवाद?
यूपी में ‘घुसपैठिए’ को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने उत्तराखंड का उदाहरण देकर वहां के लोगों को ही घुसपैठिया बता दिया। फिर क्य़ा था। यूपी की सियासत के साथ साथ उत्तराखंड भी में उबाल आ गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिलेश यादव के इस बयान को राज्य के लोगों का अपमान बताया और माफी मांगने मांग की है। जिसके बाद सपा ने अपने सुप्रीमो अखिलेश यादव के बयान पर सफाई दी और कहा- ये बयान उत्तराखंड के लोगों के लिए नहीं था बल्कि व्यक्ति विशेष के लिए था। सपा की सफाई के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने अखिलेश यादव के इस बयान को लपक लिया और इसे उत्तराखंड की अस्मिता से जोड़ दिया। जिससे अखिलेश यादव विवादों में घिर गए।
यूपी में उत्तराखंड से आए हैं घुसपैठिए – अखिलेश यादव
दरअसल, अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए भाजपा के ‘घुसपैठिए’ वाले मुद्दे पर पलटवार किया। 23 अक्टूबर को गृहमंत्री अमित शाह के घूसपैठिए वाले सवाल पर अखिलेश यादव ने बयान दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि यूपी में सबसे ज्यादा घूसपैठिए उत्तराखंड से आए हैं। यहां पर भाजपा को घुसपैठिए शब्द को डिफाइन करना पड़ेगा, क्योंकि घुसपैठिए कहकर भाजपा देश में हिंदुस्तानियत को खत्म नहीं कर सकती।
क्या अखिलेश यादव ने सीएम योगी को कहा घुसपैठिया?
अब अखिलेश यादव के इस बयान को योगी आदित्यनाथ से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि सीएम योगी का जन्म उत्तराखंड में हुआ था और वो गोरखपुर के गोरखनाथ पीठ से मठाधीश हैं। बयान के बाद उत्तराखंड में विरोध शुरू हो गया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के लोगों के सम्मान से जोड़ते हुए अखिलेश यादव से माफी की मांग की है।
अखिलेश के बयान पर सीएम धामी ने कांग्रेस को घेरा
अखिलेश यादव के इसी बयान पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1994 के रामपुर तिराहा कांड का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा का गठबंधन है, तो कांग्रेस को उत्तराखंड के लोगों का अपमान करने पर अखिलेश यादव को कहना चाहिए कि वो माफी मांगे।
दरअसल, सपा प्रमुख का ये बयान कांग्रेस के लिए भी एक चुनौती बन गया है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर सपा और कांग्रेस विपक्षी सहयोगी हैं, लेकिन उत्तराखंड में कांग्रेस भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। इसका हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अखिलेश यादव के उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहने पर आपत्ति जताई है। इससे विवाद का दायरा सपा और भाजपा से आगे बढ़कर सपा-कांग्रेस के गठबंधन की राजनीति तक पहुंच गया है। अखिलेश यादव तीखे बयानों के जरिए भाजपा के राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन यह उनपर ही उलटा पड़ गया। यह मामला सपा के लिए आगामी चुनाव में नकारात्मक असर डाल सकता है। ऐसा इसलिए कि बीजेपी अखिलेश के इस बयान को रिकॉर्ड में रखेगी और दोनों राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश और सपा के खिलाफ सियासी ढाल के रूप में इस्तेमाल करेगी।
क्या यह विवाद 2027 के चुनाव में असर डालेगा?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस बयान ने भाजपा को अखिलेश पर हमला करने का मौका दे दिया है। उत्तराखंड में भी भाजपा इसे राज्य के सम्मान और आंदोलन के इतिहास से जोड़कर उठा सकती है। भाजपा के लिए अखिलेश यादव का ये बयान यूपी में बड़ा हथियार साबित हो सकता है। भाजपा इसे यूपी में कैश करने की कोशिश करेगी।
हालांकि, अखिलेश यादव को विवादों में फंसता देख समाजवादी पार्टी ने अधिकारिक तौर पर बयान पर सफाई दी है। पार्टी का कहना है कि सपा प्रमुख ने बयान में उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया नहीं कहा बल्कि व्यक्ति विशेष के लिए घुसपैठिया शब्द का प्रयोग किया। अब देखना ये होगा कि ये सपा की ये सफाई अखिलेश यादव का विधानसभा चुनाव में बचाव कर पाती है या नहीं।




