महापर्व। धार्मिक और खगोलीय लिहाज से 15 जून, सोमवार को एक महासंयोग बन रहा है। इस दिन ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का आखिरी दिन है। साथ ही सोमवती अमावस्या और मिथुन संक्रांति भी रहेगी। पहला ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या सोमवार के दिन होने से यह सोमवती अमावस्या कहलाएंगी। दूसरा इस दिन अमृतसिद्धि योग का महासंयोग रहेगा। विशेष यह भी है कि इस दिन अधिकमास का समापन हो रहा है। सोमवती अमावस्या और संक्रांति का स्नान और दान के लिए संकल्प लेना महापुण्यदायी रहेगा।
इस लिए है खास
सनातन परंपरा में अमावस्या पितरों के लिए, सोमवार शिव पूजा के लिए, अधिक मास विष्णु पूजा के लिए और संक्रांति सूर्य आराधना का खास दिन होता है। इस दुर्लभ योग में शिप्रा व सोमकुंड में स्नान तथा दान पुण्य करने से अश्वमेघ यज्ञ करने से भी कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 15 जून को सोमवार के दिन अमावस्या का संयोग बन रहा है। इस दिन मृगशिरा नक्षत्र, शुल उपरांत गंड योग, वृषभ उपरांत मिथुन राशि के चंद्रमा की साक्षी रहेगी। पंचांग के यह पांच अंग धार्मिक दृष्टिकोण से स्नान,दान,देव दर्शन तथा किसी विशेष कामना की पूर्ति से किए जा रहे धर्म अनुष्ठान की पूर्णता के लिए विशेष माने गए हैं।
396 साल बाद यह संयोग
यह संयोग इससे पहले 10 जून 1630 को बना था। यानी पूरे 396 साल बाद वर्ष 2026 में यह दुर्लभ अवसर दोबारा आया है। अब इसके बाद ऐसा ही संरेखण अगले 301 सालों बाद, यानी 20 जून 2327 को देखने को मिलेगा, यानि 15 जून पर बन रहा यह दुलर्भ संयोग आज के लोगो के जीवन के लिए काफी अंहम है, क्योकि कई पीढ़ियों बाद यह दुर्लभ संयोग उनके जीवन में आ रही तो आने वाली कई पीढ़ियों के जीवन में ऐसा अवसर नही आने वाला है। ऐसे में इस विशेष अवसर पर आप सभी अच्छे मुहूर्त में स्नान, पूजा, दान, पुण्य का लाभ लेकर न सिर्फ स्वयं के जीवन को अच्छा बना सकते है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन को अच्छा बनाने के लिए अच्छा अवसर मिल रहा है।




