रीवा। विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े संजय गांधी और गांधी मेमोरियल चिकित्सालय में अव्यवस्था और लापरवाही का एक बेहद खौफनाक मंजर सामने आया है। यहाँ गुरुवार की रात गांधी मेमोरियल अस्पताल के ‘नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई’ (नर्सरी वार्ड) में अचानक भीषण आग लग गई। आगजनी की इस घटना से पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और चारों तरफ चीख-पुकार के साथ भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई।
शॉर्ट सर्किट के बाद धमाके के साथ उठी लपटें
यह दर्दनाक वाकया रात करीब 9:30 बजे का है। बताया जा रहा है कि नर्सरी वार्ड में उस वक्त दो दर्जन से अधिक गंभीर नवजात शिशु भर्ती थे, जिन्हें बेहद नाजुक हालत में ऑक्सीजन और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे रखा गया था। इसी दौरान वार्ड में अचानक एक जोरदार शॉर्ट सर्किट हुआ और बिजली के तार धमाके के साथ धू-धू कर जलने लगे। आग की ऊंची लपटें और धुआं देखकर वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों, स्टाफ और मरीजों के परिजनों के होश उड़ गए।
बिना मेडिकल सेफ्टी के मासूमों को बचाने की जंग
वार्ड में आग फैलती देख चारों तरफ बदहवासी का माहौल बन गया। जान बचाने की जद्दोजहद में बेबस परिजन और अस्पताल के वार्ड बॉय व अन्य कर्मचारी इन फूल जैसे नाजुक बच्चों को बिना किसी मेडिकल सेफ्टी और बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के ही गोद में उठाकर बाहर की तरफ भागने लगे। अस्पताल के फायर सिस्टम की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन जीवन रक्षक उपकरणों से अचानक दूर किए जाने के कारण इन मासूम नवजातों की हालत बेहद नाजुक हो गई है।
डीन की लापरवाही: मेंटेनेंस का भुगतान न होने से ठप पड़ा था काम
इस हादसे ने अस्पताल प्रबंधन के लचर और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान डीन द्वारा पिछले कई महीनों से विद्युत मंडल के मेंटेनेंस का भुगतान नहीं किया गया है। बजट लंबित होने के कारण अस्पताल के अंदर बिजली के रख-रखाव का काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। भीषण गर्मी के इस दौर में ओवरलोडिंग और समय पर मेंटेनेंस न होना ही इस बड़े हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।
खुद के कूलर-पंखे लाने को मजबूर हैं मरीज
इतने बड़े सरकारी अस्पताल की बदहाली का आलम यह है कि यहाँ वार्डों में कूलिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। इलाज कराने आने वाले गरीब मरीज और उनके तीमारदार इस भीषण गर्मी में खुद अपने घरों से कूलर और पंखे लेकर आने को मजबूर हैं, जो प्रबंधन के लिए बेहद शर्मनाक है। फिलहाल, घटना की जानकारी मिलते ही विभाग के इंचार्ज मौके पर पहुंचे हैं और आग के सटीक कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन इस लापरवाही ने कई मासूम जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है।




