एक तरफ जहाँ लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के तहत सिफारिशों के लागू होने और नए वेतनमान का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों की तरक्की और वित्तीय अपग्रेडेशन से जुड़ा एक अहम मुद्दा सामने आया है।
सरकार ने संसद में यह स्पष्ट कर दिया है कि मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) स्कीम के तहत 2008 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों को लाभ नहीं दिया जा सकता। इस फैसले से एक खास वर्ग के पूर्व कर्मचारियों में निराशा है, जबकि कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के सामने इस व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं।
क्या है MACP स्कीम और क्यों पड़ी इसकी ज़रूरत?
केंद्रीय कर्मचारियों के करियर में नियमित प्रमोशन में होने वाली देरी या रुकावट को दूर करने के लिए सरकार MACP (Modified Assured Career Progression) स्कीम लेकर आई थी।
- 30 साल की सेवा में 3 वित्तीय लाभ: इस योजना के तहत यदि किसी कर्मचारी को नियमित पदोन्नति (Regular Promotion) नहीं मिलती है, तो उसे 10, 20 और 30 साल की नियमित सेवा पूरी करने पर अगला ग्रेड पे (Financial Upgradation) दे दिया जाता है।
- निचले कैडर के लिए संजीवनी: यह योजना विशेष रूप से ग्रुप ‘B’ और ग्रुप ‘C’ कर्मचारियों के लिए बेहद मददगार साबित होती है, जहाँ प्रमोशन के अवसर सीमित होते हैं।
संसद में सरकार का जवाब: 2008 से पहले वालों को क्यों नहीं मिलेगा फायदा?
हाल ही में राज्यसभा में सांसद संजय सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्थिति साफ की।
सरकार का आधिकारिक रुख:
“छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत MACP योजना को 29 अगस्त 2008 को अधिसूचित किया गया था और इसे 1 सितंबर 2008 से लागू किया गया था। चूंकि यह योजना 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 के बीच अस्तित्व में ही नहीं थी, इसलिए इस अवधि के दौरान सेवा में रहे या रिटायर हुए कर्मचारियों पर इसे लागू करने का सवाल ही नहीं उठता।”
सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद यह तय हो गया है कि 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 के दौरान रिटायर हुए पूर्व केंद्रीय कर्मचारियों को MACP का एरियर या एश्योर्ड वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा।
8th Pay Commission से क्या हैं कर्मचारियों की उम्मीदें?
जहाँ एक तरफ पुराने नियम के तहत राहत नहीं मिली है, वहीं नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में MACP ढांचे में सुधार की पुरजोर मांग की है।
3 के बजाय 5 प्रमोशन की मांग
NC-JCM का तर्क है कि टेलीफोन ऑपरेटर, आर्टिसन स्टाफ, रसोइया और कुक जैसे कई कैडर पूरे 30 साल के करियर में 3 प्रमोशन भी नहीं प्राप्त कर पाते। इसलिए 8वें वेतन आयोग से मांग की गई है कि:
- वित्तीय अपग्रेडेशन की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 की जाए।
- समयसीमा को 6, 12, 18, 24 और 30 साल की सेवा पर निर्धारित किया जाए।
- टाइम-स्केल प्रमोशन (Time-Scale Promotion) लागू हो ताकि पदों की कमी के कारण कर्मचारियों का करियर ठप न पड़े।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. MACP स्कीम क्या है और यह केंद्रीय कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी है?
उत्तर: MACP (मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाली वित्तीय अपग्रेडेशन योजना है। यह योजना उन कर्मचारियों को राहत देती है जिन्हें विभागीय पदों की कमी के कारण समय पर प्रमोशन नहीं मिल पाता। इसके तहत 10, 20 और 30 साल की सेवा पर बिना पद बदले अगला पे-लेवल दे दिया जाता है।
Q2. 2006 से 2008 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों को MACP का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?
उत्तर: सरकार के अनुसार छठे वेतन आयोग की सिफारिश पर MACP योजना को 1 सितंबर 2008 से लागू किया गया था। 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 के बीच यह योजना प्रभावी नहीं थी, इसलिए उस दौरान रिटायर हुए कर्मचारियों को इस योजना के तहत वित्तीय लाभ नहीं दिए जा सकते।
Q3. 8वें वेतन आयोग में MACP को लेकर कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) ने मांग की है कि MACP के तहत वित्तीय अपग्रेडेशन की संख्या 3 से बढ़ाकर 5 की जाए। वे चाहते हैं कि कर्मचारियों को हर 6 साल (6, 12, 18, 24, 30 वर्ष) में टाइम-बाउंड करियर प्रोग्रेशन का लाभ मिले ताकि करियर में ग्रोथ बनी रहे।
Q4. क्या MACP मिलने से कर्मचारी का पद (Designation) भी बदल जाता है?
उत्तर: नहीं, MACP के तहत केवल वित्तीय लाभ (Pay Matrix/Grade Pay Upgrade) दिया जाता है। कर्मचारी का पद, पदनाम (Designation) और वरिष्ठता (Seniority) वही रहती है। यह केवल एक आर्थिक अपग्रेडेशन है, न कि कैडर आधारित नियमित पदोन्नति।
निष्कर्ष (Conclusion)
8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर हलचल तेज है। जहाँ 2008 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों के लिए MACP के दरवाजे बंद हो चुके हैं, वहीं मौजूदा कर्मचारियों की निगाहें 8th CPC पर टिकी हैं। अगर कर्मचारी संगठनों की 5 टाइम-बाउंड प्रमोशन की मांग मान ली जाती है, तो आने वाले समय में ग्रुप B और C कर्मचारियों के करियर स्ट्रक्चर में बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
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