भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ सेवाएं बिगड़ सकती है, क्योकि एमपी के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के तकरीबन 3,600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन काम बंद हड़ताल पर उतर आए है। इतना ही नही एमबीबीएस डॉक्टरों के इस हड़ताल का समर्थन जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन एवं प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी कर दिया है। जूडा ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे भी हड़ताल में शामिल होकर ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। सीनियर डॉक्टरों और प्राध्यापकों के इस संगठन ने भी सरकार से जल्द सकारात्मक कदम उठाने की अपील की है।
वेतन बढ़ाने की कर रहे है मांग
दरअसल एमपी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर काम बंद हड़ताल करके स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे है और उनका यह आंदोलन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। उनकी मांग है कि 14 हजार के स्टाइपेंड को 30 हजार किया जाए। जानकारी के तहत एमबीबीएस इंटर्न्स 14,337 रुपये के मासिक स्टाइपेंड मिल रहा है और वे 30,000 रुपये प्रति माह दिए जाने की मांग कर रहे है।
मेहनत और मंहगाई से परे है वेतन
एमबीबीएस डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पतालों में दिन-रात 24-24 घंटे की कठिन ड्यूटी करते हैं। वर्तमान स्टाइपेंड उनकी मेहनत और आज की महंगाई के हिसाब से बेहद कम है। डॉक्टरों का तर्क है कि यह लड़ाई केवल पैसों की नहीं, बल्कि उनके काम के सम्मान और उचित पारिश्रमिक की भी है।
शुरू हुआ काम बंद आंदोलन
दरअसल मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाने का आंदोलन 9 जुलाई से शुरू हुआ था। अब मध्य प्रदेश के गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल सहित प्रदेश के सभी 13 शासकीय मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स ने काम बंद कर आंदोलन का बिगुल फूंका है। यदि सरकार की ओर से ठोस और लिखित फैसला नहीं आता है, तो हमीदिया सहित प्रदेश के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में सामान्य मरीजों को समस्या आ सकती है।
हड़ताल के मुख्य बिंदु
- मध्य प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज प्रभावित हुए हैं।
- करीब 3,600 एमबीबीएस इंटर्न काम छोड़कर बैठे हैं।
- मांग है कि स्टाइपेंड को ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30,000 किया जाए।
- मरीजों की परेशानी को देखते हुए इमरजेंसी सेवाएं अभी चालू रखी गई हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
- ओपीडी (OPD) और सामान्य जांचों पर असर पड़ रहा है।
- जूडा और अन्य संगठनों के समर्थन से सेवाएं पूरी तरह ठप होने की चेतावनी है।
- मरीजों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।




