विधानसभा में महिला आरक्षण बिल पर बहस, सीएम योगी ने अखिलेश को घेरा, सपा का जवाबी तंज

उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाए गए स्पेशल सेशन के दौरान जमकर राजनीतिक हलचल हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए और विधानसभा परिसर में जमकर नारेबाजी हुई। सेशन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं के “श्राप” की वजह से कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश से खत्म हो गई थी और समाजवादी पार्टी भी उसी रास्ते पर चल रही है, इसलिए इसका खत्म होना तय है।

CM योगी ने समाजवादी पार्टी को “जन्म से ही महिला विरोधी” बताया।

समाजवादी पार्टी को “जन्म से ही महिला विरोधी” बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके राज में महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं। एक पुराने नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक ज़माना था, “SP को देखो, बेटी डरी हुई है।” भारतीय जनता पार्टी की महिला MLA बैनर और पोस्टर लेकर विधानसभा परिसर पहुंचीं। इन पोस्टरों पर महिला आरक्षण के समर्थन और कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ नारे लिखे थे। कई पुरुष BJP MLA भी समर्थन में पोस्टर लेकर पहुंचे। इस दौरान पूरे परिसर में नारेबाजी होती रही।

SP MLA भी महिला आरक्षण के समर्थन में पहुंचे।

दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी के MLA भी महिला आरक्षण के समर्थन में पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे, लेकिन उन्होंने BJP को महिला विरोधी बताया। दोनों पार्टियां जहां महिला आरक्षण के समर्थन में नारे लगा रही थीं, वहीं एक-दूसरे पर महिला विरोधी होने का आरोप भी लगा रही थीं। समाजवादी पार्टी के MLAs ने 33 परसेंट महिला आरक्षण की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। वे विधान भवन के सामने स्थित चौधरी चरण सिंह की मूर्ति के पास इकट्ठा हुए और नारे लगाए। उन्होंने मांग की कि 2023 में संसद द्वारा पास किए गए बिल के अनुसार आरक्षण लागू किया जाए।

“BJP को महिलाओं के मुद्दों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।”

SP MLAs ने आरोप लगाया कि BJP महिला आरक्षण के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है और इस बिल के जरिए मनमाने ढंग से लोकसभा सीटों का सीमांकन करना चाहती है। उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव हमेशा महिलाओं के अधिकारों के हिमायती रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी के बयान पर जवाब देते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा नेताओं से जुड़े कई मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में भाजपा को महिलाओं के मुद्दों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

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