युवा दिवस। राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 जनवरी को महान आध्यात्मिक नेता, दार्शनिक और विचारक स्वामी विवेकानंद की स्मृति में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद का प्रेरक जीवन और सशक्त संदेश युवाओं को देता है. 15-29 वर्ष के आयु वर्ग के भीतर युवाओं को परिभाषित किया जाता है, जो भारत की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हैं।
1984 में हुई थी शुरूआत
राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने की शुरुआत 1984 में हुई थी। भारत सरकार ने महसूस किया कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन और उनके आदर्श भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत हो सकते हैं। इसलिए साल 1984 में भारत सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
युवा देश के भविष्य
युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है। किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की सोच और उनकी कार्यक्षमता पर निर्भर करती है। स्वामी विवेकानंद युवाओं के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनका मानना था कि युवा शक्ति ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। उनके इसी विजन को सम्मान देने और युवाओं को राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करने के लिए भारत सरकार ने उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को विवेकानंद के आदर्शों पर चलने के लिए प्रोत्साहित करना और उनमें आत्मविश्वास जगाना है।
कौन थे स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था और उनके कर्म, ज्ञान और विवेक के आधार उन्हे स्वामी विवेकानंद के नाम से उपाधी दी गई। उनका जन्म कोलकाता में 12 जनवरी 1863 में हुआ था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक महिला थी। वे मेधावी छात्र थे और उन्होने संस्कृत, दर्शनशास्त्र, पश्चिमी दर्शन और विज्ञान का गहन अध्ययन किया। संगीत, खेलकूद (कुश्ती, जिम्नास्टिक), और भारतीय व पश्चिमी साहित्य में उनकी गहरी रूचि थी।
ऐसे चल पड़े थे समाज के राह पर
स्वामी विवेकानंद भारत के एक महान आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने रामकृष्ण परमहंस से शिक्षा ली और वेदांत व योग को दुनिया भर में फैलाया, उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जो मानवता, राष्ट्रवाद और शिक्षा पर केंद्रित था। रामकृष्ण परमहंस से भेंट उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई, जहाँ उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। गुरु के कहने पर, 1884 में दक्षिणेश्वर में काली मंदिर में उन्होंने धन के बजाय ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की प्रार्थना की।
शिकागों के भाषण ने दुनिया भर में दिलाई ख्याति
विश्व यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद उस समय दुनिया भर में चर्चित हो गए जब 1893 में शिकागो धर्म संसद में उन्होंने अमेरिकी भाइयों और बहनों कहकर अपने भाषण की शुरुआत किए और भारतीय दर्शन व आध्यात्मिकता का वैश्विक परिचय कराया। इस भाषण ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई और वेदांत को दुनिया के सामने रखा।
अंध विश्वास के रहे विरोधी
स्वामी जी ने रामकृष्ण मिशन और मठ की स्थापना करके गुरु के नाम पर मानवता और सेवा की अलख जगाई थी। उन्होने अध्यात्म को राष्ट्रवाद से जोड़ा और भारतीय युवाओं में आत्मविश्वास जगाया। समाज सुधार के क्षेत्र में उन्होने बढ़ चढ़ कर काम करते हुए जातिवाद, अंधविश्वास और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होने शिक्षा को जीवन-निर्माण और चरित्र-निर्माण का साधन माना। 4 जुलाई, 1902 को बेलूर मठ में ध्यान करते हुए महासमाधि (मृत्यु) को प्राप्त हुए, लेकिन उनके विचार आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं, और वे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
