अब अबला नही नारी, मध्यप्रदेश की महिलाएं सोलह श्रृंगार के साथ आत्मरक्षा के लिए रखती हैं बंदूक

एमपी। आज महिला दिवस मनाया जा रहा है। महिलाएं अब अबला नही बल्कि अपनी आत्मरक्षा को लेकर सशक्त हो रही है। वह चाहे मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल हो या रीवा का बीहड़ वाला क्षेत्र यहां की महिलाएं केवल पारंपरिक सोलह श्रृंगार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार भी ले रही हैं। कभी डकैतों के खौफ से शुरू हुई यह परंपरा अब महिला सशक्तिकरण की पहचान बनती जा रही है।

डकैतों का रहा गढ़

कभी डकैतों के गढ़ रहे ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में अब महिलाएं रिवॉल्वर और पिस्टल के लाइसेंस हासिल कर रही हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में देश में सबसे अधिक लाइसेंसी हथियार जारी होने की बात कही जाती है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भिंड, मुरैना और ग्वालियर जिलों में महिलाएं आत्मरक्षा के लिए हथियार लेकर एक नई मिसाल पेश कर रही हैं।

रीवा के बीहड़ की महिलाओं ने सीखा गन चलाना

रीवा जिले का बीहड़ कभी खौफ से भरा रहा। ऐसे में दस्यु प्रभावित जिले के सेमरिया तहसील क्षेत्र की आदिवासी महिलाएं स्वयं के साथ ही परिवार की सुरक्षा के लिए बंदूक चलाना भी सीखा था। जब प्रशिक्षण के लिए महिलाओं का समूह बंदूक थामे निकलता है तो हर कोई दंग रह जाता है।

महिलाओं को दिया गया था लाइसेंस

घूंघट की आड़े में सुरक्षा का सुर सीख रहीं इन महिलाओं को सरकारी प्रोत्साहन भी मिला है। सेमरिया तहसील के सुदूरवर्ती गांव ककरेड़ी, मैनहा, मझियार की महिलाओं में यह सोच और हिम्मत एक समूह गठित करने के बाद आई। यूपी सीमा से सटा क्षेत्र दस्यु प्रभावित रहा है। तब यहां की महिलाओं को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर प्रशासन ने लाइंसेस भी दिए थें और वे बंदूक कंधे पर रखकर स्वयं के साथ ही गांव परिवार की सुरक्षा को लेकर आत्मनिर्भर बनने एक कदम आगे चली।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *