रीवा के गुढ़ में जंगली हाथियों का तांडव: ग्रामीण का मकान तोड़ा, वन विभाग की लापरवाही पर भड़के विधायक

Wild elephants on a rampage in Gudh, Rewa

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र में जंगली हाथियों के एक दल ने एक बार फिर आबादी वाले इलाकों में घुसकर भारी उत्पात मचाया है। हाथियों के लगातार हो रहे इस मूवमेंट से पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत और खौफ का माहौल बना हुआ है। मंगलवार को हाथियों के इस आक्रामक झुंड ने धुअर गांव में धावा बोलकर ग्रामीण राजू सिंह के पक्के मकान को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। गनीमत यह रही कि घर के भीतर मौजूद परिवार के सदस्यों को हाथियों के आने की भनक समय रहते लग गई और वे तुरंत बाहर निकलकर भागने में सफल रहे, जिससे एक बड़ा जनहानि का हादसा टल गया।

इस घटना के बाद स्थानीय भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी तीखी नाराजगी व्यक्त की है। विधायक ने विभाग पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि करियाझर, दुआरी, बधवार और टीकर समेत गुढ़ क्षेत्र के कई गांवों में शाम ढलते ही हाथियों की सक्रियता अत्यधिक बढ़ जाती है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि ग्रामीण सूरज ढलने के बाद अपने घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, और किसान अपनी फसलों की रखवाली के लिए खेतों में जाने से पूरी तरह कतरा रहे हैं। पूरा ग्रामीण जनजीवन इस समय डर के साए में जीने को मजबूर है।

विधायक नागेंद्र सिंह ने प्रशासनिक अनदेखी को उजागर करते हुए बताया कि वन विभाग को हाथियों की इन गतिविधियों और उनके रूट की जानकारी पहले से ही थी, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धरातल पर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाथियों को खदेड़ने और क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए बनाया गया ‘रेस्क्यू प्लान’ केवल कागजों तक सीमित रहकर ठंडे बस्ते में चला गया है। विधायक ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बेघर हुए प्रभावित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा राशि प्रदान की जाए और हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर रखने के लिए एक ठोस और स्थायी कार्ययोजना पर तुरंत अमल किया जाए।

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