आखिर क्यों लिखा गया वंदे मातरम गीत, डेढ़ सौ वर्ष पूरे, पीएम मोदी ने जारी किया कार्यक्रम

वंदे मातरम। भारत की आजादी की लड़ाई में अमर भूमिका निभाने वाले वंदे मातरम गीत ने अपने 150 वर्ष का समय पूरा कर लिया है। देश भर में इस विशेष दिन को उत्सव के रूप में मनाए जाने के साथ ही यह तय किया गया है कि वंदे मातरम की डेढ़ सौ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक कार्यक्रम आयोजित किए जाऐगे। इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया है।

वंदे मातरम गीत लिखे जाने के पीछे है रोचक कहानी

इस गीत के लिखे जाने की पीछे की एक रोचक कहानी है। दरअसल अंग्रेजों ने इंग्लैंड की क्वीन के सम्मान वाले गीत- गॉड! सेव द क्वीन को हर कार्यक्रम में गाना अनिवार्य कर दिया था। जो बंकिम चंद्र समेत कई देशवासियों को पसंद नहीं था। बस यहीं से बंकिम चंद्र चटर्जी के अंदर भारत माता के लिए देशभक्ति का गीत लिखने की ललक जगी और उन्होंने 1875 में वंदे मातरम गीत की रचना की। इस गीत का भाव भारत भूमि को माता कहकर संबोधित करना है। 1882 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने उपन्यास आनंदमठ में भी इस गीत को शामिल किया गया था।

मातृभूमि के स्वाभिमान का है यह गीत

1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे गए इस गीत ने भारत की आजादी की लड़ाई में अमर भूमिका निभाई। यह गीत आज भी मातृभूमि के प्रति समर्पण, एकता और स्वाभिमान का प्रतीक है। इस गीत को संगीत में ढालने का काम रवींद्रनाथ टैगोर ने किया। 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में यह गीत पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया। सात अगस्त 1905 को इसे पहली बार राजनीतिक नारे के रूप में इस्तेमाल किया गया, जब बंगाल विभाजन के विरोध में लोग सड़कों पर उतरे थे।

कौन थें बंकिम चंद्र

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय (1838-1894) बंगाल के महान साहित्यकार और विचारक थे। उन्होंने दुर्गेशनंदिनी, कपालकुंडला, देवी चौधरानी जैसी रचनाओं के माध्यम से समाज में स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम का भाव जगाया। वंदे मातरम के जरिए उन्होंने भारतीय जनमानस को यह सिखाया कि मातृभूमि ही सर्वाेच्च देवी है। उनका यह गीत आधुनिक भारत के राष्ट्रवाद की वैचारिक नींव बन गया।

पीएम मोदी ने स्मरणोत्सव का किए शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। उन्‍होंने पोर्टल भी जारी किया। इसमें लोग राष्‍ट्रीय गीत गाते हुए अपनी वीडियो डाल सकते है और प्रमाण-पत्र प्राप्‍त कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा वंदे मातरम…

नई दिल्‍ली में इंदिरा गांधी इंडोर स्‍टेडियम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम एक मंत्र, एक ऊर्जा, एक सपना और एक संकल्‍प है। उन्‍होंने इसकी सराहना करते हुए कहा कि यह भारत माता के प्रति भक्ति और श्रद्धा है जो हमें इतिहास की याद दिलाता है, वर्तमान को आत्‍मविश्‍वास से भर देता है और भविष्‍य में एक नए साहस का संचार करता है जिससे यह विश्‍वास पैदा होता है कि किसी भी संकल्‍प और लक्ष्‍य पूरा किया जा सकता है। उन्‍होंने वंदे मातरम के सा‍मूहिक गान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके सुखद अहसास को शब्‍दों में व्‍यक्‍त नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने कहा बंकिमचंद्र चट्टोपाध्‍याय ने इस गीत के माध्‍यम से स्‍वतंत्र, एकजुट और समृद्ध भारत का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री ने बताया कि गुरूदेव रविन्‍द्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था कि बंकिमचंद्र का आनंद मठ केवल एक उपन्‍यास नहीं हैं, यह स्‍वतंत्र भारत का सपना है।

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