Uproar in SGMH after death of youth in Rewa: रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक बार फिर मरीज की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल विवेक अग्निहोत्री की मौत के बाद उनके परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और परिजनों के बीच हाथापाई भी हुई। करीब तीन घंटे तक चले बवाल के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया।
परिजनों के अनुसार, विवेक अग्निहोत्री बीती शाम करीब 7 बजे रामपुर बघेलान के समीप दो बाइकों की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें पहले रामपुर बघेलान अस्पताल ले जाया गया, जहां कथित तौर पर कोई उचित इलाज नहीं किया गया और सतना रेफर कर दिया गया। सतना में भी हालत गंभीर बताकर रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर किया गया। परिजन देर रात करीब 2 बजे विवेक को लेकर अस्पताल पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि यहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को नॉर्मल बताया और केवल एक्स-रे, सीटी स्कैन आदि जांचें कराईं। डॉक्टरों ने पैर में फ्रैक्चर बताकर प्लास्टर कराने की सलाह दी, लेकिन कोई गंभीर उपचार नहीं किया। परिजनों ने बताया कि रात भर विवेक की हालत ठीक थी, वह बोल-चाल कर रहा था, लेकिन सुबह करीब 5 बजे अचानक हालत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने कान से खून आने की शिकायत पर भी गंभीरता नहीं दिखाई और इंटरनल ब्लीडिंग जैसी स्थिति को नजरअंदाज किया। मृतक के भाई महेंद्र अग्निहोत्री और अन्य परिजनों ने विशेष रूप से डॉक्टर विमल पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि डॉक्टर ने रात में एडमिट कराने के बाद ट्रीटमेंट नहीं किया और सुबह भाग गए। परिजनों ने मांग की कि दोषी डॉक्टर को बुलाकर उनके सामने जांच हो और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर भी सवाल उठाए कि रात में ड्यूटी पर कोई वरिष्ठ डॉक्टर क्यों नहीं था। हंगामे के दौरान परिजनों ने शव नहीं उठाने की जिद की और कहा कि जब तक दोषी डॉक्टर सामने नहीं आएंगे और पूरी जांच नहीं होगी, तब तक शव नहीं ले जाएंगे।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा के हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रण में आई। पुलिस भी मौके पर मौजूद रही और हंगामे को शांत कराने में मदद की। परिजन अब दोषी चिकित्सकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और जांच की मांग कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रही है। पुलिस और अस्पताल प्रशासन मामले की जांच कर रहे हैं।




