देश में डिजिटल भुगतान करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में UPI और डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़ा एक नया संशोधन बिल पेश किया है। इस बिल के जरिए सरकार भविष्य में डिजिटल लेनदेन पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू करने की संभावना के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है। हालांकि फिलहाल आम ग्राहकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
संसद में पेश हुआ नया बिल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 4 अगस्त को पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन से जुड़ा बिल संसद में पेश किया। अभी इस बिल के तहत किसी तरह का नया शुल्क लागू नहीं किया गया है, लेकिन डिजिटल भुगतान से जुड़े कुछ प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।
क्या होता है MDR?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक तरह का शुल्क है, जो दुकानदार या कारोबारी डिजिटल पेमेंट सेवा देने वाली कंपनियों या बैंकों को देते हैं। उदाहरण के तौर पर, क्रेडिट कार्ड से भुगतान होने पर कारोबारियों को पहले से ही एक निश्चित प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है। डेबिट कार्ड पर भी कुछ शुल्क लिया जाता है, लेकिन UPI भुगतान को अब तक इससे बाहर रखा गया था।
यही वजह है कि UPI तेजी से लोकप्रिय हुआ और ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों के लिए भी सुविधाजनक विकल्प बन गया।
किस पर लागू हो सकता है शुल्क?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार जिस प्रस्ताव पर विचार कर रही है, उसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजेक्शन पर 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक MDR लगाया जा सकता है। हालांकि यह शुल्क केवल उन बड़े कारोबारियों पर लागू हो सकता है, जिनका सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
इसका मतलब है कि आम ग्राहक और छोटे दुकानदारों को फिलहाल किसी अतिरिक्त शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
MDR लागू करने की मांग क्यों उठ रही है?
डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का मानना है कि UPI पर कोई शुल्क नहीं होने के कारण कंपनियों के लिए इस सिस्टम को और बेहतर बनाने में आर्थिक चुनौतियां आती हैं। उनका कहना है कि यदि सीमित स्तर पर MDR लागू किया जाता है, तो इससे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को मजबूत करने, नई सुविधाएं जोड़ने और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि सरकार ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इस पर आगे चर्चा जारी है।




