अमेरिका और इजराइल के बीच दशकों पुराने रणनीतिक और सैन्य संबंधों में एक बड़े बदलाव के संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि अमेरिका 2027 से इजराइल को हर साल दी जाने वाली करीब चार अरब डॉलर की सहायता बंद कर सकता है। हालांकि, इस बड़े नीतिगत बदलाव के बावजूद दोनों देशों के बीच हथियारों की व्यावसायिक बिक्री का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
38 अरब डॉलर का समझौता और 2028 तक की समय-सीमा
अमेरिका और इजराइल के बीच सैन्य सहायता का मौजूदा ढांचा वर्ष 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के दौरान तय किया गया था।
- इस समझौते के तहत वित्त वर्ष 2019 से 2028 तक के दस वर्षों में कुल 38 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दिए जाने का प्रावधान है।
- व्हाइट हाउस के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इसमें 33 अरब डॉलर विदेशी सैन्य वित्तपोषण और 5 अरब डॉलर मिसाइल रक्षा कार्यक्रमों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
- इस हिसाब से सालाना सहायता का औसत 3.8 अरब डॉलर बैठता है, जिसे आमतौर पर चार अरब डॉलर के रूप में संदर्भित किया जाता है।
मौजूदा समझौता आधिकारिक तौर पर 2028 तक प्रभावी है। ऐसे में, 2027 से ही सहायता समाप्त करने के लिए कानूनी और राजनीतिक स्तर पर बड़े बदलावों की आवश्यकता होगी।
घरेलू राजनीति और ट्रम्प का बयान
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के दिन फॉक्स न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान यह बात कही।
“ट्रम्प ने अमेरिकी सहायता को घरेलू राजनीति में विवाद का विषय बताते हुए कहा कि इससे डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को रिपब्लिकन नेताओं पर निशाना साधने का अवसर मिलता है। उन्होंने मिशिगन के सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद का भी उल्लेख किया, जो इजराइल के मुखर आलोचक रहे हैं।”
ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ इस विषय पर पिछले कुछ वर्षों से चर्चा चल रही थी और इजराइल अब अमेरिकी सहायता पर पूरी तरह निर्भर रहने की स्थिति में नहीं है।
नेतन्याहू का रुख और इजरायली प्रतिक्रिया
इजराइल की तरफ से अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भरता कम करने की चर्चा कोई नई बात नहीं है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू पहले भी यह संकेत दे चुके हैं कि उनका देश भविष्य में अमेरिकी सहायता से धीरे-धीरे बाहर निकलना चाहता है।
- AP की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने जनवरी में ‘द इकोनॉमिस्ट’ से बातचीत में अगले एक दशक के दौरान अमेरिकी सहायता को धीरे-धीरे कम करने की इच्छा जताई थी।
- हालांकि, ट्रम्प की इस अचानक घोषणा के बाद इजरायली राजनीतिक गलियारों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
- पूर्व सैन्य प्रमुख और नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट ने चिंता जताई कि यदि रक्षा प्रतिष्ठान को ऐसे रणनीतिक बदलावों की जानकारी मीडिया के जरिए मिल रही है, तो यह गंभीर स्थिति है।
- विपक्षी नेता यायर गोलान ने भी चेतावनी दी कि बहु-मोर्चीय संघर्षों के इस दौर में सहायता समाप्त होने से इजराइल की सुरक्षा पर दबाव काफी बढ़ सकता है।
सहायता बंद, लेकिन हथियारों का कारोबार रहेगा जारी
यह समझना बेहद जरूरी है कि इस घोषणा का अर्थ अमेरिका और इजराइल के सैन्य संबंधों का पूरी तरह खात्मा नहीं है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि भले ही मुफ्त या अनुदान सहायता बंद हो जाए, लेकिन हथियारों की बिक्री निरंतर जारी रहेगी।
- वर्तमान व्यवस्था में विदेशी सैन्य वित्तपोषण का बड़ा हिस्सा अमेरिकी निर्मित हथियारों की खरीद में ही खर्च होता है, जो अंततः अमेरिकी रक्षा उद्योग के पास जाता है।
- यदि इजराइल अपने संसाधनों से अमेरिकी हथियार खरीदना जारी रखता है, तो दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच कारोबारी संबंध बने रहेंगे।
- हालांकि, इस बदलाव के बाद इजराइल को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अधिक घरेलू वित्तीय संसाधन जुटाने होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
डोनाल्ड ट्रम्प ने वर्ष 2027 से इजराइल को सालाना सहायता बंद करने की बात कही है।
यह समझौता 2019 से 2028 के बीच कुल 38 अरब डॉलर का है।
नहीं, सहायता बंद होने के बावजूद अमेरिका से इजराइल को हथियारों की बिक्री और व्यापारिक समझौते जारी रहेंगे।
अमेरिका में इस सहायता को लेकर बढ़ता घरेलू राजनीतिक विवाद और डेमोक्रेट्स द्वारा इसका विरोध मुख्य कारण है।
रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू पहले भी देश की निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने की मंशा जता चुके हैं।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच के संबंध एक नए और परिपक्व चरण में प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि 2027 से सहायता बंद करने की घोषणा पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है और यह अमेरिकी कांग्रेस की प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है, लेकिन यदि यह लागू होता है तो यह इजराइल की रक्षा नीति और अमेरिका की मध्य-पूर्व रणनीति दोनों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
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