रीवा। उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार शासकीय ठाकुर रणमत सिंह (टीआरएस) स्वशासी महाविद्यालय में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका दिवस’ पूरी संवेदनशीलता और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय में भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया और रीवा शहर में एक विशाल मौन जुलूस निकाला गया। कार्यक्रम में कॉलेज के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों, कर्मचारियों और सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने सहभागिता कर विभाजन के दौरान प्राण गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को नमन किया।
देश के इतिहास का सबसे दर्दनाक व काला अध्याय है विभाजन: डॉ. अर्पिता अवस्थी
ठाकुर रणमत सिंह जी की प्रतिमा के समक्ष आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी ने कहा कि भारत का विभाजन देश के इतिहास का सबसे काला अध्याय है।
“अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की कुटिल नीति ने न केवल देश को दो टुकड़ों में विभाजित किया, बल्कि सदियों पुराने साम्प्रदायिक सौहार्द को भी भारी आघात पहुंचाया। इस त्रासदी में लाखों निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।” — डॉ. अर्पिता अवस्थी, प्राचार्य
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस दर्दनाक इतिहास से सबक लेते हुए देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सदैव तत्पर रहें।
विस्थापन और नरसंहार की पीड़ा को याद रखना हमारा नैतिक कर्तव्य
सहायक प्राध्यापक प्रशांत चौरसिया ने विभाजन की विभीषिका और मानवीय त्रासदी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 1947 के विभाजन ने केवल सीमाएं नहीं बदलीं, बल्कि लाखों परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। विस्थापन, नरसंहार और उस काल में महिलाओं पर हुए अत्याचार की टीस आज भी देश के हृदय में मौजूद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विभीषिका को याद रखना हमारा नैतिक दायित्व है, ताकि भविष्य में कभी ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो और एक संगठित व मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सके।
कॉलेज चौराहे से शहर तक निकाला गया मौन जुलूस
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी लोगों ने 2 मिनट का मौन रखकर विभाजन के पीड़ितों व शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत ठाकुर रणमत सिंह जी की प्रतिमा से एक विशाल मौन जुलूस निकाला गया। मौन जुलूस कॉलेज चौराहे से होते हुए रीवा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। इस दौरान विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने पूर्ण मौन रहकर विभाजन की असहनीय पीड़ा और विस्थापन के दर्द को याद किया, जिससे पूरे मार्ग में अत्यंत गंभीर व संवेदनशील वातावरण बना रहा।
प्राध्यापकों और छात्रों की रही व्यापक सहभागिता
कार्यक्रम का सफल संयोजन इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पूनम मिश्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर:
- विभागाध्यक्ष: अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. आर. एन. तिवारी, समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश शुक्ल, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. गायत्री मिश्रा, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. उर्मिला वर्मा।
- एनएसएस: एनएसएस के जिला संगठक डॉ. नागेश त्रिपाठी सहित महाविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. पूनम मिश्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ संपन्न हुआ।




