सीधी के जलसेन धाम में बह रही धर्म की सरिता, जलपरी माता की गजब है महिमा

चुरहट। सीधी जिला अतंर्गत चुरहट के ममदर गांव के जलसेन धाम में इन दिनों धर्म की सरिता बह रही है। यहां प्रयागराज फलहारी आश्रम के संत स्वामी सुखनिधान महाराज श्रीमद भागवत महापुराण के एक-एक वृतंत को बढ़े ही रोचक ढ़ंग से भक्तों को बता रहे है तो वही संगीतमयी इस कथा में बॉसूरी धुन और भगवान के भजन में भक्त सराबोर है। इस कथा को सुनने के लिए दूर-दूर के गावों से भक्त पहुच रहे है।

भगवान के बॉसूरी तान में सूधबूघ खो देती बृज की ग्वाला

स्वामी सुखनिधान महाराज ने कथा के दौरान भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान जब अपने बॉसूरी की तान बृज में छेड़ते थें, तो वहां की ग्वालन अपना सुधबूध खो देती थी। वे अपना खाना-पान, रहन-सहन सब कुछ भूलकर भगवान की ओर दौड़ पड़ती थी। स्वामी जी ने कहा कि इसी तरह भक्त जब भगवान से प्रेम करता है तो वह उसमें रम जाता है और यही भगवान और भक्त के बीच का प्रेम सबंध है। स्वामी जी ने कहा कि जिस तरह बृज की ग्वाला के लिए भगवान की सुमधुर बॉसुरी तान उनके श्रद्धा की माध्यम बनती थी, उसी तरह भगवान की भक्ति के लिए गुरू माध्यम बनता है। जिस तरह से अगर आप को प्रयाग जाना है तो उसके लिए कोई-न-कोई वाहन माध्यम बनता है। उसी तरह भगवान का भजन भक्ति का मार्ग बनता है।

जलपरी माता की गजब है महिमा

विंध्य पर्वतमाला के तलहटी पर चुरहट के ममदार गांव में विराजमान जलपरी माता को लेकर भक्तों का कहना है कि जलधाराओं के चलते यह स्थान सदैव रमणीक रहता है। भक्त संतोष मिश्रा ने बताया कि जलपरी माता की गजब की महिमा है। बारिश में भी जलाशय का पानी माता के मंदिर को प्रवेश नही करता है। इसे माता रानी की महिमा के रूप में माना जाता हैं। पंडित बृज किशोर मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि में माता रानी की विशेष पूजा अर्चना होने के साथ ही 9 कुडीय सतचंडी यज्ञ प्रतिदिन हो रहा है। जिसमें भक्त सुबह से यज्ञ में हिस्सा ले रहे है। रामनवमी पर्व पर इस यज्ञ और कथा का समापन होगा।

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