बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के 10वीं के नतीजे कई प्रेरक कहानियां लेकर आए हैं। इनमें सबसे खास कहानी अप्पन पाठशाला मुजफ्फरपुर की है। जहां श्मशान घाट की चिताओं के बीच बैठकर पढ़ाई करने वाली दो छात्राओं ने मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी हासिल कर समाज के सामने एक बड़ी मिसाल कायम की है।
श्मशान से शिक्षा तक का चुनौतीपूर्ण सफर
शिक्षा किसी भी परिस्थिति या सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। मुजफ्फरपुर जिले के एक श्मशान घाट के पास संचालित होने वाले इस स्कूल ने यह साबित कर दिया है। अभावों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यहां के बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया है। समाज के हाशिए पर रहने वाले इन बच्चों की सफलता व्यवस्था और समाज दोनों के लिए एक कड़ा संदेश है।
कैसे हुई अप्पन पाठशाला मुजफ्फरपुर की शुरुआत?
इस विशेष पाठशाला के संस्थापक सुमित कुमार हैं। करीब आठ साल पहले उन्होंने श्मशान घाट पर एक विचलित करने वाला दृश्य देखा था। कुछ छोटे बच्चे जलती चिताओं के बीच से सिक्के और फल उठा रहे थे। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। जब सुमित ने उन बच्चों से पढ़ाई के बारे में पूछा, तो उनका जवाब था कि ‘पढ़कर क्या करेंगे’। इसी निराशाजनक जवाब ने सुमित को इन बच्चों का भविष्य संवारने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
ये भी पढ़े : रोहित शर्मा आईपीएल 2026: मुंबई इंडियंस के लिए जड़ा अपना सबसे तेज अर्धशतक
8 से 130 बच्चों तक पहुंचा कारवां
शुरुआती दिनों में इस पाठशाला में केवल आठ से दस बच्चे ही आते थे। लोगों को इस प्रयास पर संदेह था। हालांकि, सुमित के निरंतर प्रयास और जमीनी स्तर पर किए गए काम के कारण आज यहां 130 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पहले जो बच्चे दिन भर श्मशान में खेलते रहते थे, आज वे किताबों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। यह अब सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि बदलाव की एक ठोस मुहिम बन चुका है।
माही और निशा ने हासिल की शानदार सफलता
इस साल बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में अप्पन पाठशाला मुजफ्फरपुर की ओर से दो होनहार छात्राओं ने हिस्सा लिया था। माही और निशा नाम की इन दोनों लड़कियों ने प्रथम श्रेणी (फर्स्ट डिवीजन) से परीक्षा पास की है। माही ने 454 अंकों के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। रिजल्ट जारी होते ही पाठशाला में खुशी का माहौल छा गया और बच्चों ने मिठाइयां बांटकर इस सफलता का जश्न मनाया।

सब्जी विक्रेता की बेटी बनना चाहती है डीएम
शानदार अंक हासिल करने वाली माही का लक्ष्य बहुत स्पष्ट और बड़ा है। वह भविष्य में सिविल सेवा परीक्षा पास करके जिलाधिकारी (डीएम) बनना चाहती है। वहीं, जमीनी हकीकत यह है कि माही के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उसके पिता एक सब्जी विक्रेता हैं और उसी छोटी सी आमदनी से पूरे परिवार का गुजारा होता है। इसके बावजूद, माही के हौसले बुलंद हैं और वह कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर बदलना चाहती है।
ये भी पढ़े : 8th Pay Commission Timeline Explained: Salary Hike, Arrears & Details
भविष्य की चुनौतियां और आगे की राह
संस्थापक सुमित कुमार मानते हैं कि यह सफलता मील का पत्थर जरूर है, लेकिन यह केवल एक शुरुआत है। इन बच्चों को उनके अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए आगे आर्थिक और सामाजिक रूप से कई बड़ी चुनौतियां सामने हैं। इसलिए, पाठशाला अब इन बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रही है। संसाधनों की भारी कमी के बीच इन बच्चों का यह जज्बा पूरे देश के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
अधिक जानकारी के लिए, आज ही Shabdsanchi के सोशल मीडिया पेजों को फ़ॉलो करें और अपडेटेड रहें।
- Facebook: shabdsanchi
- Instagram: shabdsanchiofficial
- YouTube: @shabd_sanchi
- Twitter: shabdsanchi
