विंध्य की होली। होली पर्व के पावन अवसर पर गाया जाने वाला विंध्य क्षेत्र में फगुआ सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि एक ऐसा अनोखा अनुभव है जो हर उम्र के लोगों को अपनी धुन में थिरकने पर मजबूर कर देता है। जब फाग टोली सजीव गीतों के साथ घर-घर पहुंचती है, तो हर दरवाजे पर इनका स्वागत होता है. बच्चे, बूढ़े, जवान और महिलाएं सब झूम उठते हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर गाए जाने वाले ये गीत यहां की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं। स्थानीय भाषा में इन्हें ‘फगुआ’ कहा जाता है, जबकि कुछ लोग इसे ‘फाग’ भी कहते हैं।
बिना फगुआ के होली उत्सव अधूरा
विंध्य में यह मान्यता है कि जब तक फगुआ नहीं गाया जाता, तब तक होली का उत्सव अधूरा रहता है। शहरों और गांवों में शाम होते ही लोग टोली बनाकर निकलते हैं और एक-दूसरे के घर जाकर फगुआ गाते हैं. इन सुरों की मस्ती और प्रेम की मिठास के साथ होली का यह पर्व सच्चे आनंद का अनुभव कराता है। रीवा और विंध्य क्षेत्र में होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि संस्कृति, लोकगीतों और आपसी प्रेम का उत्सव है. यहां की पारंपरिक धरोहर आज भी जिंदा है और हर साल फगुआ के गीतों के साथ होली का यह अनोखा रंग और भी निखर जाता है.

ढोलक और मंजीरे की ताल पर होते है होली के पारंपरिक गीत
रीवा समेत विंध्य क्षेत्र में गाए जाने वाले फगुआ संगीत को ढोलक, नगड़िया और मंजीरे की ताल पर होली के पारंपरिक गीत गाए जाने की वर्षो पुरानी परंपरा हैं, जिसमें वादक स्वयं गीतों का राग छोड़ते है, और जैसे ही ये सुर फिजा में गूंजते हैं, पूरा माहौल भक्तिरस और आनंद से भर जाता है, क्योकि इस भक्ति संगीत में न सिर्फ राधा-कृष्ण के प्रेम, भगवान शिव और माता पार्वती की सच्ची भक्ति को गायक गाते है बल्कि विंध्य की कला संस्कृति को भी गीतों में पिरौया जाता है। फगुआ गीतो में हंसी-ठिठोली से भरे गीत से लेकर रिश्तों को भी गायक इतने बेहतर तरीके से गाते हुए प्रस्तुत करते है, मानों यह संगीत दिल को छू लेता है। जिसमें सभी लोग झूमते हुए फाग गीतों को गाते हुए इस उत्सव का आनंद उठाते है।
होती है प्रतियोगिताएं
कई जगह तो फाग गीतों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है। जिसमें दूर-दूर के गावों से फाग मंडलिया इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेती है। आयोजन के दौरान फाग मंडलिया प्रतियोगिता को जितने के लिए सुर और ताल के सभी गुणों को प्रर्दशित करने में कोई कंमी नही रखती है, तो ऐसे आयोजन को देखने के लिए लोगों का मजमा लगता है।
