राष्ट्रीय पंक्षी मोर का मध्यप्रदेश में होगा सरंक्षण, पुर्नवास की शुरू होगी नयी पहल

एमपी न्यूज। राष्ट्रीय पंक्षी मोर के संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किए है। उन्होने कहा कि प्रदेश में मोरों के संरक्षण और पुनर्वास की नयी परियोजना शुरू की जायेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने एशिया से विलुप्त हो चुके चीतों को पुनः प्रदेश में स्थापित करने का कार्य किया है। उन्होने बड़नगर में कवि प्रदीप सम्मान समारोह आयोजित करने का भी ऐलान किए है।

युवाओं-किसानों के लिए तैयार होगे अवसर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़नगर में फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाया जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों एवं युवाओं को रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। भाट पचलाना और इंगोरिया में नये सांदीपनि विद्यालय खोले जाएंगे। उज्जैन और आगर में आलू प्रसंस्करण की नई यूनिट प्रारंभ हो रही है, जो प्रदेश के 35 जिलों के किसानों से आलू खरीदेगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

सिंहस्थ की बड़ी तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ की तैयारी के लिये 25 हजार करोड़ के विभिन्न विकास कार्य प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा योजना पुनः प्रारंभ की गई है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ है। दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। सड़क दुर्घटना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले राहवीरो को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है तथा आवश्यकता पर एयर एम्बुलेंस एवं हेली सेवा के माध्यम से निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जायेगा। प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो गया है, मध्यप्रदेश लाल सलाम को आखिरी सलाम करने वाला प्रदेश बन गया है। बड़नगर में गीता भवन का निर्माण भी होगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं:

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय पक्षी मोर के प्राकृतिक संरक्षण और पुनर्वास के लिए 184 करोड़ रुपये की लागत से एक एकीकृत बायोडायवर्सिटी पार्क (जैविक विविधता पार्क) बनाने की योजना तैयार की गई है।

  • स्थान: यह प्रोजेक्ट भोपाल के कोलार रोड के पास शाहपुरा हिल्स (मोर वन) क्षेत्र में विकसित किया जाएगा।
  • क्षेत्रफल: यह कुल 60 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है, जिसमें से लगभग 13.72 हेक्टेयर क्षेत्र में विकास कार्य होंगे।
  • प्राकृतिक संरक्षण: इस क्षेत्र में रह रहे 200 से अधिक मोरों के प्राकृतिक बसेरे और उनकी आजीविका को सुरक्षित रखा जाएगा। पार्क का लगभग 78% हिस्सा प्राकृतिक जंगल और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
  • प्रमुख आकर्षण: इसमें लगभग 20 थीमेटिक बायोडायवर्सिटी जोन, तितली संरक्षण क्षेत्र (Butterfly Conservation Zone), एथनोबॉटैनिकल गार्डन, बर्ड एवियरी, कैंपिंग साइट और बच्चों के लिए मिनी ट्रेन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
  • तकनीक और पर्यावरण: पर्यटकों के लिए वीआर (VR), एआर (AR) और एक्सआर (XR) अनुभव, 1 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्लांट और सिंचाई के लिए 100% उपचारित (Treated) पानी का उपयोग किया जाएगा।
  • मॉडल: यह परियोजना पीपीपी (PPP – Public-Private Partnership) मॉडल के तहत तैयार की जा रही है और इसकी डीपीआर (DPR) वर्तमान में प्रक्रियाधीन है।

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