शेयर बाजार गिरावट का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा और घरेलू इक्विटी सूचकांक लगातार तीसरे सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए। वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और अहम आर्थिक आंकड़ों से पहले निवेशकों के रुख ने बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ाया।
तीसरे सत्र में भी दबाव में रहे प्रमुख सूचकांक
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत कमजोर रही और दिनभर सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव बना रहा। कारोबार के अंत में Sensex 102 अंकों की गिरावट के साथ 84,961 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 करीब 38 अंक फिसलकर 26,140 के आसपास ठहरा।
विश्लेषकों के अनुसार, गिरावट बड़ी नहीं थी, लेकिन निवेशक जोखिम लेने से बचते दिखे। हाल के सत्रों में मुनाफावसूली और सतर्क रुख ने बाजार की दिशा सीमित रखी।
शेयर बाजार गिरावट के पीछे वैश्विक और घरेलू कारक
बाजार पर दबाव का एक कारण बढ़ते वैश्विक जोखिम बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार और भू-राजनीतिक घटनाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, निवेशक अमेरिका के प्रमुख रोजगार आंकड़ों और तिमाही नतीजों से पहले स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।
घरेलू मोर्चे पर भी तीसरी तिमाही के नतीजों से जुड़ी उम्मीदें बाजार को सहारा देने में फिलहाल नाकाम रहीं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की सतर्कता ने भी धारणा को कमजोर रखा।
सेक्टरों में मिला-जुला रुझान
बाजार की गिरावट के बीच सेक्टोरल प्रदर्शन मिला-जुला रहा। आईटी शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली, जिससे आईटी इंडेक्स सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। दूसरी ओर, ऑटो और कुछ वित्तीय शेयरों में मुनाफावसूली के चलते दबाव देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित और डिफेंसिव सेक्टरों में सीमित खरीदारी कर रहे हैं, जबकि चक्रीय शेयरों में जोखिम कम कर रहे हैं।
रुपये में मजबूती से मिला सीमित सहारा
शेयर बाजार की कमजोरी के बीच रुपये में हल्की मजबूती देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले Indian Rupee 24 पैसे मजबूत होकर 89.84 के स्तर पर बंद हुआ। मुद्रा बाजार में यह मजबूती विदेशी मुद्रा प्रवाह और डॉलर में सीमित कमजोरी से जुड़ी बताई जा रही है।
हालांकि, रुपये की मजबूती का इक्विटी बाजार पर तत्काल बड़ा असर नहीं दिखा और निवेशक सतर्क बने रहे।

तकनीकी संकेत क्या बता रहे हैं
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी ने दिन के निचले स्तरों पर समर्थन लिया, लेकिन निर्णायक तेजी नहीं दिखा सका। बाजार पूरे सत्र में बिना किसी स्पष्ट दिशा के कारोबार करता रहा।
विश्लेषण के मुताबिक, निफ्टी के लिए 26,000 का स्तर अहम माना जा रहा है। इसके नीचे फिसलने पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि ऊपरी स्तरों पर टिकाऊ तेजी के लिए मजबूत खरीदारी जरूरी होगी।
आगे की चाल किन बातों पर निर्भर
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें तिमाही नतीजे, वैश्विक संकेत और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े प्रमुख हैं। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा माहौल में बाजार सीमित दायरे में रह सकता है और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
मौजूदा स्थिति में निवेशकों के लिए सतर्क रणनीति अहम मानी जा रही है। चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी देखने को मिल रही है, जबकि व्यापक बाजार में जोखिम से बचने का रुख दिख रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, स्पष्ट संकेत मिलने तक बड़े दांव से बचना और बाजार के रुझान पर नजर रखना उचित रहेगा।
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