सिंगरौली की बेमिशाल गौरव गाथा, मना रहा 3 दिन का गौरव दिवस, कैलाश खेर, भूमि त्रिवेदी दे रही प्रस्तुती

सिंगरौली। सिंगरौली महोत्सव एवं नगर गौरव दिवस 2026 का भव्य आयोजन 23 से 25 मई 2026 तक राजमाता चूनकुमारी स्टेडियम, बैढ़न में आयोजित किया है। इस महोत्सव का शुभांरभ मुख्यमंत्री मोहन यादव कर रहे है और वे सिंगरौली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो रहे है। सीएम का यहां दो दिन का दौरा है। ज्ञात हो कि इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में कैलाश खेर (23 मई) और भूमि त्रिवेदी (25 मई) की शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्थानीय जनजाति कर्मा नृत्य, और रंगोली,चित्रकला जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं। 24 मई को स्थानीय कलाकार और पारंपरिक लोकगीत एवं 25 मई को बॉलीवुड गायिका भूमि त्रिवेदी प्रस्तुती देगी। इस दौरान जनजातीय कर्मा लोक नृत्य एवं प्रतिभा सम्मान के कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे है।

ऊर्जा राजधानी के रूप में है पहचान

सिंगरौली का मुख्य गौरव देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में इसकी पहचान है, जो अपनी विशाल कोयला खदानों और प्रमुख ताप विद्युत संयंत्रों के माध्यम से देश को रोशन करता है। साथ ही, यहां की प्राचीन माडा गुफाएं, सांस्कृतिक धरोहर और तेजी से होता औद्योगिक विकास इसके गौरव को और बढ़ाते हैं। यहां के माडा में 7-8वीं शताब्दी की रॉक-कट गुफाएं मौजूद है। सिंगरौली महोत्सव एवं नगर गौरव दिवस के माध्यम से यह अपनी पहचान का जश्न मना रहा है।

रीवा रियासत का रहा हिस्सा

सिंगरौली का इतिहास प्राचीन गुफाओं, राजाओं के शासन और आधुनिक औद्योगिक विकास का एक अनूठा संगम है। यह रीवा रियासत का हिस्सा रहा यह क्षेत्र, 24 मई 2008 को सीधी जिले से अलग होकर मध्य प्रदेश का 50वां जिला बना, जिसका मुख्यालय वैढ़न है। कोयला खदानों और बिजली संयंत्रों के कारण इसे ऊर्जा राजधानी या ऊर्जांचल कहा जाता है।

सिंगरौली का प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास

सिंगरौली के मदा तहसील में 7वीं-8वीं शताब्दी की प्राचीन गुफाएं हैं, जो चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं, जैसे कि विवाह मदा, गणेश मदा, और रावण मदा। चित्रंगी गुफाएंरू यहां की चित्रित चट्टानी गुफाएं (रानीमची, ढोलगिरी) हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। यहां 1800 के दशक में, यहाँ बालंद राजपूतों, बर्दी के चंदेल शासकों और अन्य का शासन था। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, बिहरा गांव के पास लीलावर पहाड़ी के अंदर राजा बालेन्दु का महल था, जिसे अब एक पुरातात्विक स्थल माना जाता है।

आधुनिक इतिहास और विकास

सिंगरौली के रिहंद बांध को 1962 में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा उद्घाटन किया गया था। इस बांध ने क्षेत्र को औद्योगिक केंद्र में बदल दिया। यहां कोयले की मोटी परतें मिलने के बाद, यहाँ विंध्याचल सुपर थर्मल पावर स्टेशन सहित कई प्रमुख ऊर्जा कंपनियों के प्रोजेक्ट लगे। यहाँ मुख्य रूप से 50 प्रतिशत गोंड जनजाति निवास करती है, जबकि 16 प्रतिशत कोल जनजाति की प्रधानता है। यह इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है।

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