कमोडिटी बाजार में इस समय हलचल तेज है और निवेशकों की नजरें Silver Price Forecast 2026 पर टिकी हैं। अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और ग्रीनलैंड विवाद ने कीमती धातुओं की सुरक्षित मांग को बढ़ा दिया है। चांदी ने हाल के हफ्तों में सोने के मुकाबले कहीं अधिक आक्रामक बढ़त दिखाई है, जिससे बाजार विशेषज्ञों में भविष्य को लेकर बहस छिड़ गई है।
सप्लाई संकट और बढ़ती मांग का असर
चांदी की कीमतों में आई मौजूदा तेजी के पीछे सिर्फ भू-राजनीति ही नहीं, बल्कि फंडामेंटल कारण भी जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $94 प्रति औंस के पार निकल चुकी है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका द्वारा यूरोपीय संघ पर प्रस्तावित टैरिफ के कारण चांदी की इन्वेंट्री का फ्लो बाधित हो सकता है। जब मार्केट में सप्लाई कम होती है और मांग स्थिर रहती है, तो कीमतों में स्वाभाविक उछाल आता है।

Silver Price Forecast 2026: तकनीकी और आर्थिक कारक
चार्ट्स पर चांदी का व्यवहार काफी सकारात्मक दिख रहा है। शंघाई गोल्ड एक्सचेंज पर चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार की तुलना में प्रीमियम पर चल रही हैं। यह संकेत देता है कि एशियाई बाजारों में चांदी की भौतिक मांग (Physical Demand) बेहद मजबूत है। यदि चांदी $98 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करती है, तो Silver Price Forecast 2026 के अनुसार यह जल्द ही $100 प्रति औंस का ऐतिहासिक आंकड़ा छू सकती है।
औद्योगिक मांग और ग्रीन एनर्जी का योगदान
सोने के विपरीत, चांदी एक औद्योगिक धातु भी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स के निर्माण में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। 2026 में वैश्विक स्तर पर ‘ग्रीन एनर्जी’ ट्रांजिशन में तेजी आने से चांदी की खपत बढ़ी है। यही कारण है कि निवेशक इसे केवल एक कीमती धातु के रूप में नहीं, बल्कि एक आवश्यक कमोडिटी के रूप में देख रहे हैं।
वैश्विक व्यापार युद्ध और टैरिफ का डर
डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा यूरोपीय देशों पर लगाए जाने वाले 10% से 25% तक के संभावित टैरिफ ने निवेशकों को डरा दिया है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में ‘जियो-इकोनॉमिक टकराव’ सबसे बड़ा जोखिम है। इस अनिश्चितता के माहौल में डॉलर इंडेक्स में गिरावट चांदी के लिए ‘बूस्टर’ का काम कर रही है। यूरोपीय संघ भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है, जिससे व्यापार युद्ध लंबा खिंचने के आसार हैं।
चीन की अर्थव्यवस्था और खुदरा बिक्री के संकेत
चीन की अर्थव्यवस्था के हालिया आंकड़े मिले-जुले रहे हैं। जहां जीडीपी ग्रोथ ने उम्मीदों को छुआ है, वहीं खुदरा बिक्री 3 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। औद्योगिक उत्पादन में आई सुस्ती के बावजूद चांदी की कीमतों में तेजी बरकरार है। इसका मुख्य कारण चीन द्वारा बड़े पैमाने पर चांदी का आयात और स्टॉक जुटाना (Stockpiling) माना जा रहा है। भारतीय बाजार में भी चांदी ₹3,20,000 प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है।

निवेशकों के लिए जोखिम और बचाव के रास्ते
हालांकि बाजार में तेजी का माहौल है, लेकिन उच्च स्तरों पर सावधानी बरतना अनिवार्य है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का टैरिफ पर आने वाला फैसला बाजार की दिशा पलट सकता है। यदि टैरिफ को अवैध घोषित किया जाता है, तो कीमतों में तेज ‘करेक्शन’ आ सकता है। इसलिए, नए निवेशकों को एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय हर गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।
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