रीवा में वन विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, पूर्व AAP नेता प्रमोद शर्मा ने प्रेस वार्ता में किया बड़ा खुलासा

Serious allegations of corruption against forest department in Rewa

Serious allegations of corruption against forest department in Rewa रीवा: आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने प्रेस वार्ता कर वन विभाग में संगठित भ्रष्टाचार का सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग ने “ट्रैप मॉडल” नाम से एक व्यवस्था चला रखी है, जिसके तहत आरा मशीन संचालकों से नियमित रूप से मासिक अवैध वसूली की जा रही है।

प्रमोद शर्मा के अनुसार, रीवा जिले में वर्तमान में लगभग 85 आरा मशीनें संचालित हो रही हैं। इनसे हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की रिश्वत वसूली जा रही है। यह वसूली खास तौर पर दिसंबर से जून के बीच सबसे ज्यादा होती है, जब लकड़ी का काम और व्यापार चरम पर रहता है। जो संचालक रिश्वत देने से इनकार करते हैं, उन्हें जानबूझकर “ट्रैप” में फंसाकर जबरन पैसे वसूले जाते हैं।उन्होंने एक चौंकाने वाला उदाहरण दिया। कुछ महीने पहले वन विभाग की टीम ने रात के समय एक आरा मशीन में लकड़ी उतरवाकर अगले दिन कार्रवाई करने पहुंची, लेकिन पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। इसके बाद आरा मशीन संचालक से एसडीओ के चालक ने 50 हजार रुपये की मांग की, जो संचालक ने डिजिटल भुगतान (UPI/ट्रांसफर) से कर दिया।

संचालक ने मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) से शिकायत की, तो 12 दिन बाद डीएफओ ने प्रकरण बनाया। कोर्ट में मामला सुलझने के बावजूद लाइसेंस बहाल करने में जानबूझकर देरी की गई। दोषी वनकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।प्रमोद शर्मा ने प्रेस वार्ता में कई दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए। उन्होंने मांग की कि वन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा, “वन विभाग मुख्यमंत्री के अधीन है, इसलिए मुख्यमंत्री मोहन यादव को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और भ्रष्टाचार के इस संगठित नेटवर्क को खत्म करना चाहिए।”यह खुलासा रीवा जिले में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर आरा मशीन संचालकों में इस खुलासे के बाद चर्चा तेज हो गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जांच एजेंसियां इस मामले में क्या कार्रवाई करती हैं।

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