MP: होम्योपैथी क्लीनिकों को मिली बड़ी राहत, MPPPCB सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म

Homeopathy Clinics MPPCB Relief: होम्योपैथी क्लीनिकों के लिए MPPCB सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म होने से प्रदेश के हजारों चिकित्सकों को बड़ी राहत मिली है। अब रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया सरल, तेज और कम खर्चीली हो गई है, जिससे विशेषकर छोटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे क्लीनिकों के संचालन में काफी सहूलियत मिलेगी।

Homeopathy Clinics MPPCB Relief: लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने होम्योपैथी क्लीनिकों को MPPPCB (मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) सर्टिफिकेट लेने की अनिवार्यता से छूट देने का फैसला किया है। यह निर्णय उन रिपोर्ट्स के आधार पर लिया गया है, जिनमें स्पष्ट किया गया कि होम्योपैथी क्लीनिकों से बायोमेडिकल वेस्ट का उत्पादन नहीं होता है।

पहले क्या था नियम?

अब तक प्रदेश में होम्योपैथी क्लीनिक चलाने वाले चिकित्सकों को भी अन्य चिकित्सा संस्थानों की तरह MPPPCB सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य था। इसके बिना क्लीनिक का न तो रजिस्ट्रेशन हो पाता था और न ही उसका नवीनीकरण। इस प्रक्रिया में अधिक समय और कागजी कार्रवाई के कारण डॉक्टरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

अब क्या बदलाव हुआ?

नए आदेश के अनुसार, होम्योपैथी क्लीनिकों के लिए MPPPCB सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया में यह शर्त बाध्यकारी नहीं रहेगी। इससे ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण की प्रक्रिया काफी आसान और तेज हो जाएगी।

निर्णय का आधार

राज्य होम्योपैथी काउंसिल और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर पर जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि होम्योपैथी क्लीनिकों में ऐसा कोई बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न नहीं होता, जिसके लिए सख्त प्रदूषण नियंत्रण अनुमति की आवश्यकता हो। इसी आधार पर यह छूट दी गई है।

चिकित्सकों को मिलने वाले फायदे

  • रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण की प्रक्रिया अब सरल हो गई है
  • अनावश्यक दस्तावेजों और अनुमतियों से राहत मिलेगी
  • समय और आर्थिक खर्च दोनों की बचत होगी
  • विशेषकर छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में क्लीनिक चलाने में आसानी होगी

राजनीतिक प्रयासों की भूमिका

इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने और समाधान तक पहुंचाने में भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रयास अहम रहे। प्रदेश संयोजक डॉ. विशाल बघेल की पहल और लगातार फॉलो-अप के बाद यह निर्णय लिया गया। जिला सह-संयोजक डॉ. हरेंद्र सिंह भदौरिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह निर्णय सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। इससे चिकित्सकों को अनावश्यक सरकारी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी और वे बेहतर तरीके से मरीजों की सेवा कर सकेंगे।”

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