SC on OBC Age Relaxation : सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवा और सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी अगर OBC क्रीमीलेयर में आते हैं, तो उनके लिए यह खबर बहुत जरूरी है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा है कि उम्र में छूट पाने वाले OBC कैटेगरी के अभ्यर्थियों को जनरल कोटे का लाभ नहीं दिया जाएगा।
केंद्र सरकार के इस रुख से सिर्फ नई भर्तियां ही प्रभावित नहीं होंगी, बल्कि पुराने चयन, सरकारी सेवाओं में वरिष्ठता और कुछ शैक्षणिक दाखिलों पर भी असर पड़ सकता है। इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद सभी पुरानी भर्तियां या एडमिशन रद्द हो जाएंगे? सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले से OBC क्रीमीलेयर तय करने के नियमों में क्या बदलाव होगा?
सबसे जरूरी सवाल यह है कि UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल हुए 958 अभ्यर्थियों का सेवा आवंटन और ट्रेनिंग, जो इस फैसले की वजह से अब तक अटकी हुई है, क्या उनकी पात्रता की दोबारा जांच होगी? क्या उनकी जॉइनिंग पर कोई असर पड़ेगा? इन्हीं सवालों के जवाब देंगे हम इस रिपोर्ट में।
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार क्यों नहीं ले सकते जनरल कोटा
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों की भर्ती में आरक्षण से जुड़े मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए कहा कि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर उम्र में छूट लेता है, तो वह जनरल कोटे में नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इसे नियमों के खिलाफ माना।
इससे पहले, 17 जनवरी 2026 को आरक्षण से जुड़े एक फैसले में जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा था कि SC, ST और OBC कैटेगरी के होनहार उम्मीदवार जनरल कैटेगरी की सीट के हकदार हैं—बशर्ते वे आरक्षित कैटेगरी में मिलने वाली छूट का फायदा न लें। यानी OBC कैटेगरी के उम्मीदवार बिना आरक्षण का लाभ लिए, अनरिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार से अधिक अंक लाते हैं, तो ही उन्हें जनरल कोटे में गिना जाएगा।
यह फैसला केरल हाईकोर्ट के 2020 के एक फैसले पर सुनवाई के दौरान आया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को जनरल लिस्ट से मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (MRC) के उम्मीदवारों को बाहर करने और एक अनरिजर्व उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में क्या कहा?
मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने जनरल कोटे को लेकर कहा कि ‘अनरिजर्व’ कैटेगरी जनरल उम्मीदवारों के लिए कोई ‘कोटा’ नहीं है, बल्कि यह एक ‘ओपन’ कैटेगरी है, जो पूरी तरह मेरिट के आधार पर सभी के लिए उपलब्ध है।
फैसले को स्पष्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला दिया। अनुच्छेद 14 कानून के सामने समानता की बात करता है, जबकि अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरी में अवसर की समानता की। बेंच ने कहा कि इन दोनों अनुच्छेदों के आधार पर मेरिट के मुताबिक बदलाव जरूरी है।
फैसले के मुताबिक, जब आरक्षित कैटेगरी के उम्मीदवार बिना किसी छूट का फायदा लिए—जैसे उम्र या फीस में छूट लिए बिना—जनरल उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें ‘ओपन’ उम्मीदवार के तौर पर गिना जाना चाहिए। इससे आरक्षित कोटे की सीट उसी आरक्षित कैटेगरी के अगले सबसे योग्य उम्मीदवार के लिए खाली हो जाती है।
UPSC के 958 चयनित उम्मीदवारों की ट्रेनिंग क्यों रुकी?
अब सीधे मुद्दे पर आते हैं—सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के इस रुख से UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के उन 958 चयनित उम्मीदवारों की ट्रेनिंग पर क्या असर पड़ेगा, जो इस फैसले की वजह से अटकी हुई है?
सिविल सेवा परीक्षा 2025 में चयनित 958 उम्मीदवारों का सेवा आवंटन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। आमतौर पर मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में फाउंडेशन कोर्स अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में शुरू हो जाता है। लेकिन क्रीमीलेयर नियमों पर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण इस बैच का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी अटका हुआ है।
केंद्र सरकार ने 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में फैसले को लागू करने के तरीके पर स्पष्टीकरण मांगा था। केंद्र चाहता है कि पुराने नियमों के तहत हुई चयन प्रक्रियाओं, नियुक्तियों और तय अधिकारों पर फैसले का पिछली तारीख से ऐसा असर न पड़े कि पहले के मामले दोबारा खुल जाएं।
24 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। 25 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उम्मीदवारों के सेवा आवंटन और ट्रेनिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी। इससे कुछ सरकारी नौकरियों और संस्थानों पर असर पड़ने की आशंका है।
इसका सबसे ज्यादा असर UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के चयनित 958 उम्मीदवारों के सेवा आवंटन और ट्रेनिंग पर पड़ सकता है। इसके अलावा IAS, IPS और अन्य सिविल सेवाओं के चयनित उम्मीदवारों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड और बैंकिंग जैसी भर्तियों के पुराने मामलों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पुराने OBC उम्मीदवारों के मामलों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। जिन उम्मीदवारों को पहले OBC क्रीमीलेयर मानकर आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया था, वे नए मानदंडों के आधार पर अपने मामलों की समीक्षा की मांग कर सकते हैं। हालांकि, इससे उन्हें अपने-आप नौकरी या आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश पर है। इसके बाद ही केंद्र सरकार स्पष्ट करेगी कि नए मानदंड मौजूदा और पुराने मामलों में किस तरह लागू किए जाएंगे।
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