Santan Saptmi Vrat 2025 : कैसे बनाएं दुबड़ी सातें का पाटा यानी चौकी – भारत में हर एक धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाज का अपना विशेष स्थान है, जो लोगों की आस्थाओं और विश्वासों को दर्शाता है। इन्हीं में से एक है “दुबड़ी सातें” या “संतान साते” पूजा, जिसे विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति और संतान के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए किया जाता है। इस पूजा का उल्लेख विशेष रूप से हिंदू धर्म में मिलता है, जहां यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। दुबड़ी सातें पूजा, जिसमें मिट्टी की आकृतियों और विशेष रूप से बनायी गई प्रतिमाओं का प्रयोग किया जाता है, संतान सुख के लिए की जाती है। इस पूजा में विशेष रूप से देवी-देवताओं, संतान, और उनके स्वास्थ्य से संबंधित प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इस लेख में हम दुबड़ी सातें पूजा के महत्व, उसकी विधि और इसे बनाने के तरीके पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
दुबड़ी सातें पूजा का महत्व – दुबड़ी सातें पूजा का उद्देश्य संतान के लिए सुख की प्राप्ति की प्रार्थना है। कई बार ऐसा देखा जाता है कि दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति में, दुबड़ी सातें पूजा एक प्रकार से आशीर्वाद और दैवीय सहायता प्राप्त करने का एक उपाय मानी जाती है। इसमें विशेष रूप से बच्चों की सेहत और लंबी उम्र के लिए आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से उन परिवारों के लिए अहम है, जो संतान सुख की प्राप्ति के लिए उपाय ढूंढ रहे होते हैं। इसके अलावा, यह पूजा संतान के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने, उनकी शिक्षा में सफलता और जीवन में समृद्धि प्राप्त करने के लिए भी की जाती है।
दुबड़ी सातें पूजा बनाने की विधि – यह पूजा विशेष रूप से मिट्टी से बनाई जाने वाली आकृतियों और प्रतिमाओं से जुड़ी होती है। इस पूजा का मुख्य उद्देश्य संतान की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करना है, इसलिए इसे बड़ी श्रद्धा और ध्यान से करना चाहिए। नीचे दी जा रही है।
इस पूजा को बनाने की पूरी विधि –
मिट्टी की तैयारी – दुबड़ी सातें पूजा के लिए सबसे पहले आपको मिट्टी की आवश्यकता होती है। यह मिट्टी किसी विशेष स्थान से ली जाती है, और इसे पूजा के लिए साफ किया जाता है। यह सुनिश्चित करें कि मिट्टी शुद्ध और बिना किसी मिलावट के हो। यदि आप शुद्ध मिट्टी प्राप्त नहीं कर सकते तो बाजार से तैयार मिट्टी का उपयोग कर सकते हैं।
आकृतियों का निर्माण – अब इस मिट्टी का उपयोग विभिन्न आकृतियां बनाने में किया जाता है। इन आकृतियों में प्रमुख रूप से संतान, देवी-देवताओं, और सांपों की आकृतियां बनाई जाती हैं। जैसे इस चित्र में देखा जा सकता है, वहाँ अलग-अलग आकृतियां हैं जैसे कि लोग, सांप, और अन्य धार्मिक प्रतीक बनाएं जो की कथा के पात्र है ।
पूजा स्थल का निर्माण – इस पूजा को करने के लिए एक स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करना आवश्यक है। पूजा स्थल को मिट्टी की आकृतियों और अन्य धार्मिक प्रतीकों से सजाया जाता है। एक लकड़ी के पाटे पर लाल – सफ़ेद या पीला रंग का कपड़ा इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसा कि चित्र में नील रंग का दिखाई दे रहा है,लेकिन नीला कलर नहीं लेना है।
आकृतियों का सजाना – अब इन आकृतियों को इस पूजा स्थल पर अच्छे से सजाएं। संतान, देवी-देवता, और अन्य धार्मिक प्रतीकों को विधिपूर्वक स्थापित करें। संतान की आकृतियाँ खास रूप से मध्य में रखी जाती हैं, जबकि सांप और अन्य प्रतीकों को चारों ओर रखा जाता है। इस दौरान ध्यान रखें कि आकृतियों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित तरीके से सजाया जाए।
पूजा अर्चना – अब पूजा अर्चना की शुरुआत कीजिए। पूजा में विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। इन मंत्रों का उच्चारण संतान सुख की प्राप्ति, संतान के स्वास्थ्य, और उनकी लंबी उम्र के लिए किया जाता है। परिवार के सभी सदस्य पूजा में शामिल होते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रसाद और आशीर्वाद – पूजा समाप्त होने के बाद, पारंपरिक रूप से प्रसाद वितरण किया जाता है। यह प्रसाद घर के सभी सदस्य खाते हैं और पूजा के आशीर्वाद से अपने जीवन को संपूर्ण और सुखमय बनाने की कामना करते हैं।
विशेष – दुबड़ी सातें पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, विशेष रूप से उन परिवारों के लिए जो संतान सुख की प्राप्ति की कामना करते हैं। यह पूजा न केवल संतान के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए होती है, बल्कि यह परिवार की खुशहाली और समृद्धि को सुनिश्चित करने का भी एक मार्ग है। पूजा के दौरान बनाए गए धार्मिक प्रतीक और आकृतियाँ उस पूजा के महत्व को और बढ़ा देती हैं। अंततः, दुबड़ी सातें पूजा को श्रद्धा, विश्वास और सही विधि से करने से निश्चित रूप से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आशीर्वाद मिलता है।