Lack of gunny bags and verification at procurement centres in Rewa has increased the problems of farmers: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में धान उपार्जन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलने के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। खरीदी केंद्रों पर बारदाने की भारी कमी और सीमित किसानों के सत्यापन की जटिल प्रक्रिया ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कड़ाके की ठंड में किसान केंद्रों पर दो-दो दिन इंतजार करने को मजबूर हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव उन्हें और परेशान कर रहा है।
करहिया मंडी के बाहुरी बांध खरीदी केंद्र पर गुरुवार को बारदाने खत्म हो जाने से धान की तौल का काम पूरी तरह ठप हो गया। केंद्र प्रभारी किसानों को बारदाने कब आएंगे, इसकी जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई अन्य केंद्रों पर भी यही स्थिति है, जहां बारदाने न होने से तौल नहीं हो पा रही। किसान अपनी ट्रॉलियां लेकर आए हैं, लेकिन खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
ठंड से बचने के लिए अलाव तक की व्यवस्था नहीं होने से बुजुर्ग और बच्चे सहित किसान खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं। इसके अलावा, धान उपार्जन के लिए पंजीकृत सीमित किसानों के सत्यापन की प्रक्रिया भी बड़ा रोड़ा बनी हुई है। कई किसान तहसील कार्यालय और खाद्य आपूर्ति विभाग के चक्कर काट रहे हैं। कुछ किसानों का धान तो केंद्र पर तौल लिया जा चुका है, लेकिन डेटा फीडिंग नहीं होने से भुगतान रुका हुआ है।
सत्यापन के लिए 19 दिसंबर अंतिम तिथि है, जिसके बाद अनसत्यापित किसानों की उपज खरीदी नहीं जाएगी। कुछ किसानों का सत्यापन हो चुका है, लेकिन अधिकांश अभी लंबित है।किसानों का कहना है कि सरकारी स्तर पर की गई तैयारियों के बावजूद जमीनी स्तर पर लापरवाही साफ दिख रही है। बारदाने की आपूर्ति और सत्यापन प्रक्रिया में देरी से उनकी फसल बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है।
बतादें कि जिले में धान उपार्जन 2 दिसंबर से शुरू हुआ है और 20 जनवरी 2026 तक चलेगा, लेकिन इन समस्याओं से किसानों में निराशा है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि तत्काल बारदाने उपलब्ध कराए जाएं और सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि किसान ठंड में और परेशान न हों। यह स्थिति न केवल रीवा जिले तक सीमित है, बल्कि प्रदेश के कई हिस्सों में धान खरीदी को लेकर इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्याओं का तुरंत निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
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