RBI MPC: आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव! जानें डिटेल्स

RBI MPC Result Repo Rate: मौद्रिक नीति समिति फरवरी 2026 की बैठक को लेकर बाजार और आम लोगों में खास उत्सुकता रहती है. गौरतलब है कि, बजट पेश होने और भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते के बाद यह पहली बड़ी नीति समीक्षा है, RBI अब किस दिशा में जाएगा, क्या दरों में कटौती का सिलसिला जारी रहेगा या फिलहाल विराम दिया जाएगा.

आपको बताएं बीते एक साल में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती हो चुकी है, इसलिए एक्सपर्ट मान रहे थे कि RBI कुछ समय के लिए रुक सकता है. वहीं कुछ का कहना है कि ग्रोथ को बनाए रखने के लिए एक और छोटी कटौती की गुंजाइश बची है.

MPC बैठक संपन्न?

गौरतलब है कि, RBI की MPC बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 के बीच आयोजित हुई. यह फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की आखिरी पॉलिसी समीक्षा भी है. इससे पहले MPC की पिछली बैठक दिसंबर 2025 में हुई थी. बैठक के बाद आज यानी 6 फरवरी को सुबह 10 बजे RBI गवर्नर ने मौद्रिक नीति का फैसला घोषित किया और दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. इस बार भी RBI ने लाइव प्रसारण के जरिए जनता को सीधे अपडेट देने की व्यवस्था रखी है.

रेपो रेट स्थिर

आपको अहम बात बताएं फरवरी बैठक से अधिकतर अर्थशास्त्रियों को आशा यही थी कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा. वजह ये है कि पिछले एक साल में RBI ने लगातार कटौती की है, जिससे कर्ज पहले से सस्ता हो चुका है. ऐसे में अब नीतिगत दरों को स्थिर रखना ज्यादा संभावित माना जा रहा था. हालांकि बता दें कि कुछ विश्लेषक ये भी मानते थे कि आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए एक और छोटी कटौती की संभावना बनी हुई है. लेकिन इस बार रेपो रेट स्थिर रखी गई है.

आम लोगों पर असर?

आखिर रेपो रेट है क्या तो आपको बता दें कि यह वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है और बैंक इसी के आधार पर अपने लोन की ब्याज दरें तय करते हैं. जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो होम, ऑटो और पर्सनल लोन महंगे हो जाते हैं और EMI बढ़ जाती है. वहीं रेपो रेट घटने पर कर्ज सस्ता होता है और EMI कम हो जाती है. यही कारण है कि, MPC का फैसला सीधे आम लोगों की जेब, खर्च करने की क्षमता और कर्ज के बोझ को प्रभावित करता है. इस बैठक का परिणाम कई परिवारों के लिए लोन की लागत और बजट बनाने की योजना को तय करेगा.

आर्थिक गति देने में रेपो रेट की होती है अहम भूमिका

देशभर में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में रेपो रेट की अहम भूमिका होती है. जी हां रेपो रेट अगर कम की जाती है तो लोग प्रॉपर्टी और ऑटो लोन अधिक लेते हैं, जिससे बाजार में आर्थिक फ्लो बढ़ता है. और अगर इसकी दर बढ़ी तो बाजार के फ्लो में थोड़ी कमी आती है.

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