पहले धरना और अब संसद में काले कपड़े पहनकर पहुंचे विपक्ष के सांसद: राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक का सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा

राहुल गांधी

संसद के मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है। छात्र आंदोलनों, बार-बार होते पेपर लीक (Paper Leaks) और प्रदर्शनकारी युवाओं पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्षी दलों (INDIA Bloc) ने सड़क से लेकर संसद तक मोर्चा खोल दिया है। सड़क पर हुए विरोध-प्रदर्शन और नेताओं की धरपकड़ के बाद, बुधवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही एक अलग ही नजारा देखने को मिला। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद भवन पहुँचे

विपक्ष ने संसद परिसर के ऐतिहासिक मकर द्वार पर ‘ब्लैक डे’ (Black Day) मनाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्ष की साफ मांग है कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर जवाबदेही तय की जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।

विरोध का मुख्य कारण: पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई

देशभर में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं और परीक्षार्थियों के मन में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर पिछले कुछ दिनों से देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर छात्र संगठन और विपक्षी दल प्रदर्शन कर रहे थे।

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प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा छात्रों के साथ की गई कथित बदसलूकी और पानी की बौछारों के इस्तेमाल ने आग में घी डालने का काम किया।

विपक्ष के मुख्य आरोप:

  • युवाओं के भविष्य से खिलवाड़: देश में एक के बाद एक परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, जिससे सालों की मेहनत पानी में मिल रही है।
  • तानाशाही रवैया: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और विपक्ष के नेताओं पर बल प्रयोग किया गया।
  • संसद में चर्चा से भागने का आरोप: विपक्ष का कहना है कि सरकार इस अत्यंत संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर संसद के नियम 267 के तहत सीधी चर्चा कराने से बच रही है।

राहुल गांधी का रुख: “यह देश के युवाओं और उनके स्वाभिमान की लड़ाई है। जब तक करोड़ों छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता और धांधली के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, विपक्ष चुप नहीं बैठेगा।”

सड़क से संसद तक: कैसे बढ़ा यह राजनीतिक घटनाक्रम?

संसद में काले कपड़ों के विरोध प्रदर्शन की पटकथा संसद के बाहर लिखी गई। इस घटनाक्रम की शुरुआत कुछ इस तरह हुई:

समय/दिनघटनाक्रम
दिन 1 (सड़क पर विरोध)छात्र संगठनों ने पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन शुरू किया। सुरक्षा बलों ने वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया।
दिन 2 (नेताओं का मार्च)राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रमुख विपक्षी नेता छात्रों के समर्थन में लोक कल्याण मार्ग (PM आवास) की ओर बढ़े। पुलिस ने विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया।
दिन 3 (संसद में ‘ब्लैक डे’)डिटेंशन से रिहा होने के बाद विपक्षी सांसद रणनीति बनाकर काले कपड़ों में संसद पहुंचे। मकर द्वार पर जोरदार नारेबाजी और इस्तीफे की मांग।

राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक का आक्रामक रुख

संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखे हमले किए। प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों की मांगें जायज हैं और वे अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। जब बड़े-बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जा सकते हैं, तो देश के युवाओं को एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली क्यों नहीं दी जा सकती?

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि काला रंग विरोध और दुख दोनों का प्रतीक है। उन्होंने सवाल किया कि लगातार हो रही गड़बड़ियों के बावजूद शिक्षा मंत्री को पद पर क्यों बनाए रखा जा रहा है?

सरकार की सफाई और पलटवार

दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार ने विपक्ष के इन आरोपों को राजनीतिक स्टंट करार दिया है।

  • चर्चा के लिए तैयार: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार संसद के नियमों के तहत पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बहस के लिए पूरी तरह तैयार है।
  • राजनीति करने का आरोप: सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं चाहता, बल्कि केवल संसद की कार्यवाही को बाधित कर मीडिया अटेंशन हासिल करना चाहता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

संसद में काले कपड़े पहनकर विपक्ष का यह विरोध महज एक सांकेतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह आने वाले दिनों में और तीखे राजनीतिक टकराव का संकेत है। NEET और पेपर लीक का मुद्दा सीधे तौर पर देश के करोड़ों युवा मतदाताओं और उनके परिवारों से जुड़ा है।

राहुल गांधी और पूरी ‘INDIA’ देवबंदी रणनीति के तहत इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह जीवित रखना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या संसद में इस गंभीर विषय पर किसी सार्थक चर्चा का रास्ता निकलता है या यह गतिरोध आगे भी जारी रहेगा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: विपक्षी सांसदों ने संसद में काले कपड़े क्यों पहने?

उत्तर: विपक्षी सांसदों ने देश में हो रहे लगातार पेपर लीक (जैसे NEET) और इसके विरोध में सड़कों पर उतरे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए ‘काला दिवस’ मनाया और काले कपड़े पहने।

Q2: राहुल गांधी की इस विरोध प्रदर्शन में क्या भूमिका रही?

उत्तर: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे आंदोलन की अगुवाई की। वे छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरे, जहाँ उन्हें हिरासत में भी लिया गया। इसके बाद संसद परिसर में भी उन्होंने काले कपड़े पहनकर सरकार को घेरा।

Q3: विपक्ष संसद में क्या प्रमुख मांगें कर रहा है?

उत्तर: विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें हैं—

  1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री का तत्काल इस्तीफा।
  2. छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और बदसलूकी की निष्पक्ष जांच।
  3. संसद के नियम 267 के तहत पेपर लीक पर तुरंत विस्तृत चर्चा।

Q4: इस विवाद पर सरकार का क्या पक्ष है?

उत्तर: सरकार का कहना है कि वह संसद के तय नियमों के तहत इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने के लिए तैयार है। सरकार के अनुसार विपक्ष चर्चा करने के बजाय संसद का समय बर्बाद और राजनीति कर रहा है।

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